इस तरह के मामले सामने आने के बाद पुलिस ने जमानतदारों की नकेल कसनी शुरू कर दी है। सभी माफिया के जमानतदारों की सूची बनाकर नोटिस भेजा जा रहा है और थाने में आने के बाद उनसे इकरारनामा लेने की कवायद शुरू कर दी गई है। एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने बताया कि माफिया के जमानतदारों को नोटिस भेजा गया है। थाने पर बुलाकर इकरारनामा लिया जाएगा। सभी माफिया की गतिविधियों पर पुलिस की नजर है।
सभी माफिया के बैंक खातों की पुलिस जांच कर रही है। लेनदेन से ही साफ होगा कि किससे और किस मदद में रुपये लिए गए हैं। पूर्व में माफिया के करीबियों को हिरासत में लेकर भी पुलिस ने पूछताछ की है। इससे भी अहम जानकारियां पुलिस के हाथ लगी है। पुलिस माफिया के एक-एक काम की ब्योरा जुटा रही है।
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खबर है कि माफिया अजीत शाही के पास एक कंपनी और एक बैंक के रिकवरी का काम है। इसमें चरित्र प्रमाण पत्र लगता है, जिसे माफिया ने अपने रिश्तेदार का लगाया है। पुलिस की ओर से बैंक और कंपनी से पत्राचार कर इसे रद कराने की कवायद भी शुरू कर दी गई है।
माफिया विनोद और उसके भाई संजय उपाध्याय की तलाश में लखनऊ गई टीम बुधवार को खाली हाथ लौट आई है। माफिया के सबसे बड़े शरणदाता ने भी उससे अपना पीछा छुड़ा लिया है। अब पुलिस लखनऊ में उससे संपर्क में रहने वाले लोगों के ठिकानों के बारे में पता लगा रही है।
बताया जा रहा है कि माफिया गोरखपुर के आसपास के जिलों में छिपा हो सकता है। उसकी पूरी जुगत है कि पुराने मामले में जमानत निरस्त कराकर वह कोर्ट में हाजिर हो जाए, लेकिन जमानतदारों पर पुलिस की नजर होने की वजह से वह अपने इस चाल में अब तक कामयाब नहीं हो पाया है। पुलिस का दावा है कि उसकी गिरफ्तारी कर ली जाएगी।