माफिया विनोद उपाध्याय और उसके भाई संजय की तलाश में क्राइम ब्रांच और गुलरिहा थाना पुलिस देवरिया के साथ ही लखनऊ में भी छापा मार रही है। गिरोह के कई सदस्य के साथ ही परिवार के लोग पुलिस की हिरासत में हैं। संभावित ठिकानों पर छापा तेज होने के बाद माफिया के रिश्तेदारों ने भी घर छोड़ दिए हैं। बताया जा रहा है कि क्राइम ब्रांच की टीम दो दिन से लखनऊ में विनोद के संभावित ठिकानों पर पहुंची है।
स्थानीय पुलिस की मदद से कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है। बताया जा रहा है कि सर्विलांस की मदद से यह जानकारी मिली है कि विनोद अपने परिजनों से इंटरनेट काल के जरिये बात करता था। हिरासत में लिए गए भतीजों से पुलिस ने इस बारे में पूछा तो उन्होंने स्वीकार किया है। इसके अलावा कई रिश्तेदारों ने इस बात की पुष्टि की है।
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विश्वविद्यालय के स्टेडियम निर्माण में भी वसूली थी रंगदारी
माफिया विनोद उपाध्याय एक दशक से ठेके और रंगदारी में शामिल है। गोरखपुर विश्वविद्यालय में स्टेडियम के निर्माण में भी माफिया ने एक ठेकेदार से रंगदारी वसूली थी। सहारनपुर जेल में रहते हुए भी माफिया का नेटवर्क चलता रहा। उसके इशारे पर गुर्गे ठेकेदारों से वसूली करते थे। ठेके में दखल के चलते ही विनोद उपाध्याय और उसके एक करीबी के बीच ठन गई थी और बाद में करीबी ने नाता तोड़कर एक राजनीतिक पार्टी का दामन थाम लिया।
जानकारों की माने तो विनोद ने रंगदारी और ठेके में दखल का नेटवर्क अपने बड़े भाई और कुछ खास करीबियों के बलबूते खड़ा किया है। गोरखपुर में जब पुलिस का दबाव बढ़ा तो उसने लखनऊ में ठिकाना बनाया और बसपा के बड़े नेताओं से संपर्क बना लिया। खबर यह भी है कि उसने सीधे तौर पर ठेका नहीं लिया। अधिकारियों पर दबाव बनाकर पहले ठेका दिलवाया और फिर कमीशन लिया। बीते पांच सालों में विनोद ने विवादित जमीनों को हड़प कर मोटी कमाई की है।
करीब 20 वर्ष पहले विनोद उपाध्याय विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव के दौरान चर्चा में आया था। उस दौरान महामंत्री के एक प्रत्याशी के समर्थन में विनोद की टीम उतरी थी और नामांकन के दिन गोलघर में तमंचे से कई फायर कर अपना दबदबा कायम किया था। इसके बाद से ही विनोद का गैंग बढ़ता गया। विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष पर एक होटल में जानलेवा हमले में भी उसका नाम सामने आया।
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विनोद के गिरोह में ज्यादातर धर्मशाला, असुरन और राजेंद्र नगर इलाके के मनबढ़ थे। बाद में पीडब्लूडी में ठेके को लेकर लाल बहादुर और गुड्डू से विनोद की अदावत बढ़ी। मामला बढ़ा तो एक बार दोनों तरफ से गोलियां चलीं थीं, जिसमें विनोद का एक करीबी मारा गया था। इसके बाद से विनोद ने अपनी ताकत बढ़ानी शुरू कर दी और ठेके व रंगदारी में सक्रिय हो गया।
एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने कहा कि माफिया के खिलाफ वारंट जारी है, सभी माफियाओं के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। उनके अवैध कारोबार के बारे में जानकारी कर तथ्य के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सभी माफिया के बैंक खातों का भी पुलिस डिटेल जुटा रही है।