उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में फोरेंसिक लैब शुरू होने से आरोपियों को वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जल्द सजा दिलाने का रास्ता आसान हो गया है। पिछले छह महीने में दुष्कर्म और हत्या के 300 मामलों की जांच स्थानीय लैब में की गई और उसकी रिपोर्ट पुलिस को समय से उपलब्ध करा दी गई। फायदा यह हुआ कि पुलिस चार्जशीट दाखिल करने के दौरान ही वैज्ञानिक साक्ष्य भी प्रस्तुत कर रही है।
पहले फोरेंसिक जांच के लिए नमूने लखनऊ भेजे जाते थे। ऐसे में हत्या व दुष्कर्म के मामलों में साक्ष्यों की जांच कर रिपोर्ट आने में महीनों का समय लगता था। अब गोरखपुर जोन की जांच शहर में ही हो पा रही है और रिपोर्ट भी उपलब्ध कराई जा रही है। पॉक्सो एक्ट के कई मामले ऐसे हैं, जिनमें सप्ताह के भीतर विवेचक के पास रिपोर्ट भेज दी गई।
दुष्कर्म व हत्या के मामले में बीते तीन माह में तीन सौ से अधिक नमूने भेजे गए हैं। इसमें 180 से अधिक नमूने दुष्कर्म से संबंधित रहे। 120 नमूने हत्या से संबंधित रहे। 30-40 मामले ऐसे रहे हैं, जिनमें नमूने अधूरे आने के कारण उन्हें विवेचक के पास वापस कर दिया गया। शेष में परीक्षण के बाद विवेचक को रिपोर्ट भेजी गई।