बाल-बाल बचीं पोस्ट मास्टर, अधिवक्ताओं में नाराजगी
कलक्ट्रेट परिसर में 114 साल पुराने भवन में संचालित हो रहा सब पोस्ट ऑफिस
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। कलक्ट्रेट परिसर में 114 साल पुराने जर्जर भवन में संचालित सब पोस्ट ऑफिस की दीवार के प्लास्टर का कुछ हिस्सा बृहस्पतिवार को भरभराकर गिर गया। समीप में बैठीं पोस्ट मास्टर बीना शुक्ला बाल-बाल बच गईं। हादसे से अधिवक्ताओं में नाराजगी है।
जानकारी के मुताबिक, सब पोस्ट ऑफिस में विभागीय लोग जान जोखिम में डालकर कार्य कर रहे हैं। भवन जर्जर होने से यहां आने वाले अधिवक्ता सहित अन्य लोगों में भी डर बना रहता है। पोस्ट ऑफिस के भवन का निर्माण 1910 में हुआ था। छत का प्लास्टर तो आए दिन गिरता रहता है। दो दिन पहले भी हादसा होने से बचा था।
पोस्ट ऑफिस में सात लोग कार्यरत हैं, जबकि हर दिन करीब 200 अधिवक्ता सहित अन्य लोग आते-जाते हैं। अब तो अधिवक्ता भी वहां जाने से कतराने लगे हैं। परिसर में इस पुराने भवन में मात्र पोस्ट ऑफिस ही संचालित हो रहा है जबकि बाकी भवन को जमींदोज करने के निर्णय के बाद अन्य कार्यालयों को शिफ्ट कर दिया गया है।
बताया गया कि सब पोस्ट ऑफिस को यहां से स्थानांतरित करने के लिए से जिला प्रशासन को 10 से अधिक पत्र भेजा जा चुका है, लेकिन कागजी प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी।
कोट
सब पोस्ट ऑफिस जर्जर भवन में संचालित होने का मामला मेरे संज्ञान में है। इस मामले में प्रशासन के सहयोग से जल्द ही पोस्ट ऑफिस दूसरे कमरे में शिफ्ट किया जाएगा।
- बीके पांडेय, एसएसपी, पोस्ट ऑफिस
जब दीवार से प्लास्टर का टुकड़ा पोस्ट मास्टर के बगल में गिरा तो हम सब पोस्ट ऑफिस में ही मौजूद थे। सभी लोग सन्न रह गए और बाहर निकल गए। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
- भानु प्रकाश मणि त्रिपाठी, अधिवक्ता
सुबह 11 बजे में एक रजिस्टर्ड पोस्ट के लिए सब पोस्ट ऑफिस में जैसे ही प्रवेश किए, वैसे ही दीवार से सीमेंट का टुकड़ा गिरा। इस दौरान सभी लोग डर गए और पोस्ट मास्टर घबरा गईं थीं।
- विनय कुमार श्रीवास्तव, अधिवक्ता
-
सब पोस्ट ऑफिस शिफ्ट नहीं होने से लोगों की जान हमेशा जोखिम में रहती है। पोस्ट ऑफिस करीब है इसलिए लोग यहां आते हैं। प्रशासन को इस पर ध्यान देने की जरूरत है।
- संजय श्रीवास्तव, अधिवक्ता
-
सब पोस्ट ऑफिस में किसी काम से जाते हैं तो कोशिश करते हैं कि जल्द ही बाहर निकल जाएं। इसकी छत या दीवार से कभी भी प्लास्टर का टुकड़ा गिर सकता है।
- राजेश मिश्रा, अधिवक्ता