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Corona in Gorakhpur: बीआरडी में शुरू होगी प्लाज्मा थेरेपी, जानिए कब से मिलेगी सुविधा

Fri, 21 Aug 2020 07:34 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

  • बीआरडी प्राचार्य की पहल पर शासन ने दी अनुमति
  • सिंतबर माह के प्रथम सप्ताह में मरीजों को सुविधा मिलने की उम्मीद
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Plasma Therapy - फोटो : Social Media
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विस्तार
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कोरोना को हरा चुके मरीज जल्द ही दूसरे संक्रमितों की जान बचाएंगे। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना मरीजों का इलाज होगा। शासन की ओर से बीआरडी को इसकी अनुमति मिल गई है। प्लाज्मा थेरेपी के उपयोग में आने वाली मशीन एफेरेसिस इसी सप्ताह मिल जाएगी। कॉलेज प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि सिंतबर माह के पहले सप्ताह में प्लाज्मा थेरेपी शुरू हो जाएगी।

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प्रदेश में सबसे पहले लखनऊ के पीजीआई में प्लाज्मा थेरेपी की शुरुआत हुई थी। इसके बाद केजीएमयू में भी यह सुविधा शुरू हुई है। बीआरडी प्राचार्य ने इसे लेकर शासन को प्रस्ताव भेजा था, जो मान लिया गया है। अब बीआरडी में भी प्लाज्मा थेरेपी जल्द ही शुरू हो जाएगी। इसके बाद प्लाज्मा ऐसे मरीजों को लिया जाएगा, जो कोरोना से जंग जीत चुके हैं। इसकी वजह यह है कि उनके अंदर अब तक नई एंटीबॉडी विकसित हो गई होगी।

बीआरडी प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि कोविड-19 से ठीक हो चुके मरीजों के अंदर एंटीबॉडी अब विकसित हो गई होगी। ऐसे मरीजों से प्लाज्मा डोनेट करने की अपील की जाएगी।
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उन्होंने बताया कि प्लाज्मा थेरेपी दिए जाने के लिए तीमारदार और मरीज की अनुमति ली जाएगी। इसके बाद ही उनका प्लाज्मा लिया जाएगा। गंभीर मरीजों में शुगर, गुर्दा, हृदय रोग व कैंसर पीड़ित कोरोना संक्रमितों के लिए यह थेरेपी काफी हद तक कारगार साबित होगी।

 

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इन मरीजों पर प्लाज्मा थेरेपी का होगा उपयोग

प्लाज्मा थेरेपी का उपयोग गंभीर मरीजों पर होगा। संक्रमित मरीज के रेस्परेटरी रेट प्रति मिनट 30 से ज्यादा हो। ब्लड में ऑक्सीजन की मात्रा 93 फीसदी से कम हो। एक्सरे में फेफड़े में धब्बे 48 घंटे में 50 फीसदी बढ़े हो। रेस्पिरेटरी फेलियर, सेप्टिक शॉक,मल्टी ऑर्गन फेलियर जैसे मरीजों को प्लाज्मा चढ़ाया जाएगा।

क्या है प्लाज्मा थेरेपी
डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि प्लाज्मा थेरेपी कोरोना से ठीक हुए मरीजों का रक्त होता है, जिनमें ठीक होने के बाद एंटी बॉडी विकसित हो जाती है। ऐसे मरीजों के प्लाज्मा को मरीजों में ट्रांसफ्यूज किया जाता है। इस थेरेपी में एटीबॉडी का उपयोग किया जाता है, जो कि किसी वायरस खिलाफ शरीर में बनते है।

यह एंटीबॉडी कोरोना से ठीक हो चुके मरीज के शरीर से निकालकर बीमार शरीर में डाला जाता है। मरीज पर एंटीबॉडी का असर होने पर वायरस कमजोर होने लगता है। इसके बाद मरीज के ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने कहा कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज को प्लाज्मा थेरेपी की अनुमति मिल गई है। जल्द ही एफेरेसिस मशीन भी बीआरडी को मिल जाएगी। इसके बाद प्लाज्मा थेरेपी पर बीआरडी की टीम काम करना शुरू कर देगी। यह थेरेपी गंभीर मरीजों के लिए अब तक काफी असरदार साबित हुई है।
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