प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के कर्मचारी और फार्मासिस्टों को 15 महीने से मानदेय नहीं मिला है। इसकी वजह से उनके सामने परेशानी खड़ी हो गई है। मानदेय न मिलने की वजह से कर्मचारी बच्चों के स्कूल की फीस भी नहीं भर पा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक सरकारी अस्पतालों में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों के संचालन की जिम्मेदारी गुंजन इंटरप्राइजेज को मिली है। इसमें तैनात कर्मचारियों और फार्मासिस्ट को इंटरप्राइजेज की तरफ से मानदेय देना था। फार्मासिस्टों का शैक्षणिक सर्टिफिकेट भी औषधि केंद्र के लाइसेंस के लिए लगा हुआ है।
केंद्र पर तैनात फार्मासिस्ट ने बताया कि उन्हें मानदेय के तौर पर 15 हजार और सहायक को सात हजार रुपये मिलने थे, लेकिन पिछले 15 महीने से यह रकम नहीं मिली है। जबकि औषधि केंद्र पर 60 से 80 फीसदी सस्ते दर पर जेनरिक दवाएं मिलती हैं। गोरखपुर में जिला अस्पताल व महिला अस्पताल में एक-एक जन औषधि केंद्र चल रहा है। इसके अलावा जिले में 16 केंद्र निजी संचालक चला रहे हैं।
गुंजन इंटरप्राइजेज के संचालक दिवाकर सिंह ने बताया कि पिछले डेढ़ साल से इन केंद्रों पर तैनात फार्मासिस्टों ने कोई हिसाब नहीं दिया है। बिक्री की जानकारी नहीं दी है। यह बात सत्य है कि काफी समय से मानदेय नहीं दिया गया है। मामले में नए मैनेजर की तैनाती गई है। अब हिसाब करके सभी को मानदेय दिया जाएगा।