कोरोना की दहशत अब लोगों के दिलों दिमाम पर छा गया है। युवाओं से लेकर बुजुर्गों के बीच कोरोना वायरस की चर्चा अब उन्हें मानसिक रूप से बीमार बना रही है। कोरोना के डर के बीच लोगों में डिजीज फोबिया (बीमार होने का डर) का खतरा बढ़ रहा है। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में मनोविज्ञान विभाग की ओपीडी बंद होने से ऐसे मरीज परेशान हो रहे है।
उन्हें समझ नहीं आ रहा वह करें तो क्या करें। इस पर विशेषज्ञ उन्हें यह सलाह दे रहे हैं कि वह घरों से न निकले और परिवार के बीच समय बिता कर समस्या को दूर करें। ज्यादा जरूरी हो तो डॉक्टरों से सलाह पर ही दवा लें। कोरोना के भय की वजह से नींद न आना, मानसिक संतुलन बिगड़ना, घबराहट बेचैनी, चक्कर आने जैसी समस्यां देखने को मिल रही है।
लोग सोशल मीडिया पर ऐसे रोगों का इलाज भी ढूंढ र हे है। परिचित डॉक्टरों से फोन पर ही सलाह ले रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि सलाह लेने के बाद उन्हें दवा नहीं मिल पा रही है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग के एचओडी डॉ तपस बताते है कि बुजुर्गों में यह समस्या ज्यादा देखी जा रही है। बुजुर्गों के बीच कोरोना का भय है।
यही कारण है कि वह लोग डिजीज फोबिया के शिकार हो रहे है। ऐसे मरीजों की देखभाल ज्यादा जरूरी है। ऐसे मरीजों से परिवार के लोग अधिक से अधिक बात करें ओर कोरोना वायरस से निपटने के तरीके बताएं। बताया कि ऐसे मरीज पैनिक अटैक, घबराहट, डिप्रेशन के शिकार हो सकते हैं। इसलिए जरूरी हे कि डॉक्टरों से सलाह लेकर थोड़े दिनों के लिए दवा ले सकते हैं। बताया कि ऐसे मरीजों के फोन भी आ रहे है, जो फोन पर ही सलाम मांग रहे है।