शहर में हर रात पड़ोसी जिले देवरिया-कुशीनगर, महराजगंज के अलावा बिहार के गोपालगंज, बगहा, बेतिया से गंभीर मरीज के बेहतर इलाज की उम्मीद लिए अनजान लोग गोरखपुर शहर में पहुंचते हैं। उनके इंतजार में यहां पहले से जाल बिछाए दलाल हमदर्द बनकर निजी अस्पतालों में बेहतर इलाज का झांसा देकर अपने चंगुल में फांस लेते हैं।
एक बार मरीज इनके झांसे में आ गया तो जब तक घरवाले पूरा खेल समझ पाते हैं, तब तक उनसे लाख-दो लाख रुपये ठगे जा चुके होते हैं। इस धंधे में अस्पताल संचालक से लेकर एंबुलेंस चालक और दवा विक्रेताओं का पूरा एक नेटवर्क है। कई बार इनका खेल पकड़ा भी जा चुका है।
आसपास के जिलों के अलावा बिहार के गोपालगंज और पश्चिमी चंपारण जिले में भी अभी बेहतर इलाज के लिए गोरखपुर पर ही निर्भरता है। हर दिन करीब 10 हजार बाहरी मरीज गोरखपुर के विभिन्न अस्पतालों में इलाज को आते हैं। दिन में आए मरीजों के पास तो सरकारी और अच्छे निजी अस्पतालों के कई विकल्प होते हैं, लेकिन शाम ढलते ही दिक्कत बढ़ने लगती है।
सरकारी अस्पतालों के इमरजेंसी वार्ड अपने स्थानीय मरीजों से भरे होते हैं। बाहर से आए गंभीर मरीज को लेकर परिजन इधर-उधर भटक रहे होते हैं। ऐसे परेशान लोगों पर ही मरीज माफिया की नजर होती है। एम्स और बीआरडी मेडिकल कॉलेज से लेकर रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन तक इनकी नजर रहती है।
जैसे ही कोई ऐसा मरीज दिखता है, तुरंत ही ये हमदर्द सक्रिय हो जाते हैं। मरीज को अस्पताल पहुंचाने से लगायत डॉक्टर तक से बात करने में इतनी तत्परता दिखाते हैं कि परेशान मरीज के परिजन समझ ही नहीं पाते कि ये दलाल है या उनका रिश्तेदार।
बिहार से एंबुलेंस से सीधे मंगाए जाते हैं मरीज
मरीज माफिया के इस धंधे में सबसे कारगर हथियार एंबुलेंस है। देवरिया, कुशीनगर, गोपालगंज, बगहा, बेतिया आदि जगहाें पर चलने वाले निजी एंबुलेंस चालक इन अस्पताल संचालकों के संपर्क में रहते हैं। एंबुलेंस से वह मरीज गोरखपुर के अस्पताल तक पहुंचाते हैं तो परिजनों से तय किराए के अलावा अस्पताल की तरफ से भी दो से ढाई हजार रुपये चालक को मिलते हैं।
अब तो इन्होंने सरकारी एंबुलेंस चालकों को भी अपने नेटवर्क में शामिल कर लिया है। पिछले दिनों देवरिया से जिस बीमार बच्चे को अर्पित हाॅस्पिटल तक पहुंचाया गया था, उसे सरकारी एंबुलेंस चालक ने ही दलाल तक पहुंचाया था। इसके बदले उसे रुपये भी मिले थे।
पहले भी पकड़े जा चुके हैं मामले
पैडलेगंज के ईशू अस्पताल में बिहार से आए मरीज को लाकर इलाज किया जा रहा था। मौत के बाद भी उसे वेंटिलेटर पर रखा बताकर परिजनों से रुपये की मांग की जा रही थी। आधी रात को पुलिस ने छापा मारकर अस्पताल को सील किया था।
काली मंदिर के नजदीक स्थित एक अस्पताल में बिहार के बगहा से आई महिला का ऑपरेशन कर दिया गया। महिला की मौत होने पर परिजनों ने हंगामा किया तो पुलिस पहुंंची और शव का पोस्टमार्टम कराकर घरवालों को सौंप दिया गया। बाद में दोनों पक्ष ने समझौता कर लिया।
तारामंडल इलाके एक अस्पताल में गोला क्षेत्र के महिला का हाथ में दर्द होने पर ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन थिएटर में ही महिला की मौत हो गई। हंगामा होने पर अस्पताल संचालक भाग खड़ा हुआ। इस मामले में भी बाद में समझौता हो गया।
मेडिकल कॉलेज रोड स्थित एक अस्पताल में कुशीनगर से आए मरीज का ऑपरेशन कर दिया गया। मौत होने पर आनन-फानन उसे दूसरे अस्पताल ले जाने को कहा गया। घरवालों ने हंगामा किया तो पुलिस पहुंची और कार्रवाई का आश्वासन देकर मामला शांत कराया।
जहां से भी शिकायत मिलती है, तत्काल जांच व कार्रवाई होती है। वीडियो में जिन अस्पतालों पर मरीज खरीद फरोख्त का आरोप लगा है, उन सभी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। अगर अस्पताल संचालकों की संलिप्तता की बात सामने आई तो लाइसेंस निरस्त कर अस्पताल सील कराए जाएंगे:
डॉ. आशुतोष दुबे, सीएमओ