- गोरखपुर मंडी में आगरा से रोजाना आ रहा करीब 200 क्विंटल मिलावटी खोआ
- जौनपुर, गाजीपुर से आ रहा है मिलावटी पनीर, सहालग में बढ़ी मिलावटखोरी की रफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर/ देवरिया। त्योहार के बाद अब सहालग में मिठाइयों की बढ़ती मांग का फायदा मिलावटखोर उठाने लगे हैं। इस समय गोरखपुर मंडी में खोआ की मांग तीन गुना बढ़ गई है। इसको पूरा करने के लिए आगरा की मंडी से खोआ और जौनपुर से पनीर की आपूर्ति हो रही है। बताया जा रहा है कि रोजाना 400 क्विंटल की खपत है। इसमें 200 क्विटल मिलावटी खोआ है। यहां से गोरखपुर मंडल के जिलों के अलावा पड़ोसी बिहार तक खोआ की सप्लाई होती है। बस्ती मंडल में कानपुर से खोआ की खेप पहुंच रही है।
इस साल नवंबर-दिसंबर में खूब शादियां हैं। 22, 25, 26 व 29 नवंबर की बुकिंग ज्यादा है। सारे मैरेज हॉल और होटल फुल हैं। कैटरिंग के कारोबार से जुड़े बंटी राज ने बताया कि शायद ही कोई गांव या कस्बा ऐसा है, जिसमें नवंबर-दिसंबर के बीच एकाध शादी न हो। हर शादी में खाने में पनीर और मिठाई में छेना और खोआ से बनी मिठाई की डिमांड रहती है। इस बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए दुकानदारों ने एडवांस बुकिंग ले रखी है। इसका फायदा धंधेबाज उठा रहे हैं।
50 से अधिक जगहों पर बन रहा मिलावटी पनीर
जिले भर में 50 से अधिक जगहों पर इस मिल्क पाउडर से मिलावटी पनीर बनाया जा रहा है। इस मिल्क पाउडर में फैट के लिए रिफाइंड ऑयल और मिठास के लिए सैकरीन का इस्तेमाल हो रहा है, जो लिवर और आंत को सीधे प्रभावित कर रहे हैं। शाकाहारी लोग स्वाद के लिए आजकल पनीर को सबसे अधिक तवज्जो दे रहे हैं। स्थिति यह है कि अकेले खोआ मंडी में हर दिन करीब 50 क्विंटल पनीर की खपत हो रही है। सहालग में यह बढ़कर 80 क्विंटल तक पहुंच जा रहा है।
इसके अलावा बिछिया, मोहद्दीपुर, मेडिकल कॉलेज, सोनौली रोड और फलमंडी इलाके में भी पनीर बनता है। ग्रामीण इलाके में पिपराइच, कैंपियरगंज, भटहट के अलावा खजनी और बड़हलगंज क्षेत्र में भी पनीर बन व बिक रहा है। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर मिल्क पाउडर और रिफाइंड का प्रयोग कर कृत्रिम पनीर बन रहा है। इसका असर बाजार पर पड़ रहा है और गोरखपुर में मिल्क पाउडर की प्रतिदिन की खपत एक हजार क्विंटल को पार कर गई है। अब कुल 10 दुकानों से मिल्क पाउडर बिक रहा है। एक साल में मिल्क पाउडर की तीन से चार दुकानें बढ़ी हैं।
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महज 250 ग्राम पाउडर से बनता है एक किलो पनीर
मिठाई बनाने के कारीगर हनुमान गुप्ता ने बताया कि एक किलो पनीर बनाने में करीब 250 ग्राम पाउडर की जरूरत होती है। पाउडर को अच्छी तरह से घोलने के बाद इसमें नींबू का रस मिलाया जाता है, जिससे वह दही जैसा बन जाता है। इसे कपड़े में बांधकर ठंडे पानी में डुबोया जाता है। इसके बाद फ्रिज में रख दिया जाता है। इस तरह से तैयार पनीर में करीब 200 ग्राम पानी और 800 ग्राम ठोस पदार्थ होता है। बाजार में पनीर व छेना की मिठाई बनाने के लिए अलग मिल्क पाउडर है, जिसकी कीमत 270 से 300 रुपये प्रति किलोग्राम है।
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भिंड-मुरैना से बनकर आगरा पहुंचता है खोआ
अभी तक कानपुर की मंडी में पाउडर वाला खोआ गोरखपुर आता था और यहां से देवरिया-कुशीनगर तक पहुंचता रहा है। अब एक नया सेंटर आगरा में विकसित हो रहा है। बाजार के जानकार बताते हैं कि मध्य प्रदेश के ग्वालियर के नजदीक वाले इलाके भिंड और मुरैना में बड़ी मात्रा में असली के साथ ही मिलावटी खोआ भी बनता है। हल्के भूरे रंग का वहां का मिलावटी खोआ असली जैसा दिखता है। वे उसे आगरा की मंडी में पहुंचा देते हैं। वहां से धंधेबाज इसे गोरखपुर की मंडी तक पहुंचा रहे हैं। बताया जा रहा है कि धंधेबाज इसमें प्रति किलोग्राम 50 रुपये तक का फायदा पाते हैं।
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सेहत के लिए नुकसानदेह है मिलावटी खोआ-पनीर
मिलावटी खोआ और पनीर में इस्तेमाल किए गए रसायन और सिंथेटिक पदार्थ पाचन तंत्र को कमजोर करते हैं। इससे बच्चों और बुजुर्गों में दस्त, उल्टी, पेट दर्द और गैस एसिडिटी की शिकायत तेजी से बढ़ जाती है। वनस्पति घी और रिफाइंड ऑयल की अत्यधिक मात्रा शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ाती है, जिससे दिल के रोगों का खतरा बढ़ जाता है। वहीं सिंथेटिक जमावट एजेंट और डिटर्जेंट जैसे रसायनों से बने पनीर से किडनी व लिवर पर सीधा दुष्प्रभाव पड़ता है।
- डॉ. राजेश कुमार, फिजिशियन, जिला अस्पताल
कोट
राजस्थान बाॅर्डर से खोआ आने की सूचना है। पिछले दिनों प्राइवेट बसों से कानपुर से आया मिलावटी खोआ पकड़ा गया था। मिलावटी पनीर के गाजीपुर-जौनपुर से आने की जानकारी है। जगह-जगह जांच की जा रही है।
-डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त, खाद्य गोरखपुर