प्रो. दयानाथ।
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दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के आचार्य प्रो. दयानाथ त्रिपाठी भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका नाम देश के प्रसिद्ध इतिहासकारों में शुमार है। विश्वविद्यालय में तमाम यादें अब भी ताजा हैं, जिसे शिक्षक दिवस पर याद किया जाता है। वह अनुशासन बनाकर रखते थे।
प्रो. त्रिपाठी के नाम कई उपलब्धियां हैं। ग्रीक एवं हिंदुत्व संस्कार पर कई शोध कर चुके प्रो. त्रिपाठी को तत्कालीन राष्ट्रपति के अनुमोदन पर इलाहाबाद संग्रहालय व राष्ट्रीय संग्रहालय के संचालन समिति में सदस्य नामित किया गया था।
प्रो. त्रिपाठी के पुत्र प्रो. उमेश नाथ त्रिपाठी भी गोरखपुर विश्वविद्यालय के रसायन विभाग में आचार्य हैं। वे बताते हैं कि प्रो. दयानाथ त्रिपाठी ने प्राचीन इतिहास एवं पुरातत्व से स्नातक व परास्नातक की पढ़ाई इलाहाबाद विश्विद्यालय से 1956 में की थी, फिर पीएचडी के लिए विदेश चले गए। इसके लिए भारत सरकार से छात्रवृत्ति भी मिली। पीएचडी की डिग्री साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय, इंग्लैंड से हासिल की थी। गोरखपुर विश्वविद्यालय में 1958 से अध्यापन कार्य शुरू किया।
नियंता के रूप में उनका कार्यकाल विश्वविद्यालय के अनुशासन के लिए याद किया जाता है। इसके अतिरिक्त इतिहास विभाग के अध्यक्ष और हॉस्टल के वार्डेन भी रहे। शोध पर आधारित पांच पुस्तकें लिखी थीं। गोरखपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष भी रहे। शिक्षकों की समस्या को उठाते थे। प्रो. त्रिपाठी का जन्म 17 जून 1938 में हुआ था। सात जनवरी 2022 को प्रो. त्रिपाठी का निधन हो गया।