गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) में बढ़ीं सुविधाओं और बीटेक पाठ्यक्रमों में घटी फीस का नतीजा यह है कि विदेशी छात्रों ने भी प्रवेश में दिलचस्पी दिखाई है। अमेरिका, ओमान समेत छह देशों के 98 छात्रों ने आवेदन किया गया है, जो अब तक का सर्वाधिक है।
सार्क और गैर सार्क देशों के विद्यार्थियों के लिए फीस में कमी किए जाने के बाद विदेशी छात्रों की एमएमएमयूटी में पढ़ाई की रुचि अधिक होती नजर आ रही है। विश्वविद्यालय के शैक्षणिक सत्र 2026-27 में स्टडी इन इंडिया पोर्टल के माध्यम से छह देशों से कुल 98 आवेदन प्राप्त हुए हैं। विश्वविद्यालय के अनुसार, सर्वाधिक 60 आवेदन बांग्लादेश से आए हैं।
इसके अलावा नेपाल और अमेरिका से 15-15, ओमान से पांच, सूडान से दो तथा मोजाम्बिक से एक आवेदन मिला है। अभ्यर्थियों ने कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार, विद्युत, मैकेनिकल, केमिकल तथा सिविल इंजीनियरिंग जैसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आवेदन किया है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के अधिष्ठाता प्रो. डीके. द्विवेदी ने कहा कि विभिन्न देशों से मिले आवेदन विश्वविद्यालय के शैक्षणिक अंतरराष्ट्रीयकरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं। इससे परिसर में बहुसांस्कृतिक शैक्षणिक वातावरण विकसित होगा और वैश्विक स्तर पर विश्वविद्यालय की पहचान मजबूत होगी।
बोलीं कुलपति
छह देशों के विद्यार्थियों से आवेदन प्राप्त होना विश्वविद्यालय के लिए गर्व की बात है। यह एमएमएमयूटी की शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान आधारित शिक्षण और उद्योगोन्मुखी पाठ्यक्रमों के प्रति अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है। विभिन्न देशों के विद्यार्थियों की उपस्थिति से परिसर में वैश्विक दृष्टिकोण विकसित होगा और विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीयकरण के प्रयासों को नई गति मिलेगी
- प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा, कुलपति एमएमएमयूटी
पिछले साल आए 60 से 70 आवेदन, अधिकांश ने नहीं लिया प्रवेश
गोरखपुर। कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय ने विदेशी विद्यार्थियों के लिए शुल्क में बड़ी कटौती की है। सत्र 2025-26 में गैर-सार्क देशों के विद्यार्थियों से 8000 अमेरिकी डॉलर तथा सार्क देशों के विद्यार्थियों से 4000 अमेरिकी डॉलर शुल्क लिया जाता था। अब सत्र 2026-27 में इसे घटाकर क्रमशः 5000 अमेरिकी डॉलर और 2500 अमेरिकी डॉलर कर दिया गया है। पिछले वर्ष विश्वविद्यालय को लगभग 60-70 अंतरराष्ट्रीय आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें अधिकांश विद्यार्थी बांग्लादेश, नेपाल और भूटान से थे लेकिन अपेक्षाकृत अधिक फीस होने के कारण अधिकांश ने प्रवेश नहीं लिया। शुल्क में कमी के बाद इस वर्ष विदेशी छात्रों के प्रवेश में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है। कहा कि अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के लिए सीटों की संख्या पहले भी कुल स्वीकृत सीटों का अधिकतम 15 प्रतिशत थी और सत्र 2026-27 में भी यही व्यवस्था लागू रहेगी।