गोरखपुर। जिले में सहकारिता विभाग की ओर से संचालित 188 साधन सहकारी समितियां हैं। इन सभी समितियों के संचालक मंडल का चुनाव नियम से होता है। सभी की बैलेंस शीट बनती है। सहकारिता की भाषा में कोई समिति डेड नहीं है। लेकिन, जिले की केवल 107 साधन सहकारी समितियां ही कार्य कर रही हैं। उनके जरिए ही किसानों को खाद-बीज दिया जाता है। 81 समितियों के उर्वरक का व्यवसाय नहीं करने से उस क्षेत्र के किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
एडीसीओ एलबी मल्ल के मुताबिक, पहले जिले की सभी साधन सहकारी समितियां उर्वरक का व्यवसाय करती थीं। वहां से किसानों को खाद-बीज उधार में मिलता था। समितियां गेहूं और धान की खरीद भी करती थीं। लेकिन, 2012 में जिला सहकारी बैंक ने समितियों को ऋण देना बंद कर दिया। इससे सभी समितियों ने उर्वरक के साथ ही अन्य व्यवसाय बंद कर दिया।
बाद में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत पांच लाख का ऋण 107 समितियों को दिया गया। उनसे कहा गया कि इससे वे अपना व्यवसाय करें। इस धनराशि से उर्वरक लाएं और उसे बेच कर धनराशि जमाकर दूसरी बार उर्वरक लाएं और किसानों में वितरित करें। इस तरह से समितियां उर्वरक व्यवसाय कर रही हैं।
कुछ सदस्यों की अमानत से कर रहीं व्यवसाय
एडीसीओ एलबी मल्ल के मुताबिक, जिले की कुछ ऐसी साधन सहकारी समितियां हैं जो समिति के सदस्यों से धन लेकर समिति चला रही हैं। इनकी संख्या बहुत कम है। उन्होंने बताया कि साधन सहकारी समितियों की ओर से सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है। सदस्यता अभियान का निर्धारित लक्ष्य सभी समितियां पूरे कर लेंगी। सदस्यता अभियान पूरा होने के बाद जिले की सभी समितियां उर्वरकों का व्यवसाय करने लगेंगी। तब किसानों को किसी प्रकार की उर्वरक की दिक्कत नहीं होगी।