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लॉकडाउन में बेरोजगारों को 'नई पहल' की संजीवनी, बेहतर विकल्प साबित हो सकता है ये हथियार

Mon, 04 May 2020 11:54 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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कोरोना वायरस। - फोटो : अमर उजाला
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महामारी बन चुके कोरोना वायरस और लॉकडाउन के इस दौर में आर्थिक संकट और वैश्विक मंदी की बातें हो रही हैं। लाखों लोगों ने अपनी नौकरियां गवां दी हैं। 44 लाख से अधिक आबादी वाले गोरखपुर और उसके आसपास के जिलों में भी बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हुए हैं।
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इनमें श्रमिक, कामगार और यूपी से बाहर तमाम छोटी-मोटी नौकरियां कर रहे युवा शामिल हैं। बेरोजगारों में वे युवा भी हैं जो अभी-अभी पढ़ाई पूरी कर निकले हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में किन क्षेत्रों में और कहां रोजगार मिलेगा इसको लेकर आम आदमी से लेकर सरकार तक फिक्रमंद है।
 
लॉकडाउन के बीच शहर के 15 लाख से अधिक लोगों को सहूलियत पहुंचाने वाला ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गौरव सिंह सोगरवाल का 'गोरखपुर मॉडल' यानी ऑनलाइन होम डिलीवरी पोर्टल भी रोजगार का बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। लॉकडाउन के बाद भी लंबे समय तक संक्रमण से बचाव को लेकर लोग सतर्क रहेंगे।
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सोशल डिस्टेंसिंग हमारी जिंदगी का हिस्सा बनेगा। ऐसी स्थिति में ज्यादातर लोगों के ऑनलाइन ही अपनी जरूरत की चीजें मंगाने की आदत बनी रहने की संभावना है। एक बड़ा तबका तो पहले से काफी हद तक ऑनलाइन शॉपिंग पर निर्भर है। ऐसे में बेरोजगार युवाओं के लिए ये डिलीवरी पोर्टल रोजगार का अच्छा जरिया बन सकता है। छोटे स्तर पर इसे शुरू करने में ज्यादा खर्च भी नहीं है।  

थोड़ी सी सक्रियता, थोड़ी मेहनत और तैयार हो जाएगा सेटअप: मासिर
जिला प्रशासन के सहयोग से लॉकडाउन में पहला होम स्टेप डिलीवरी पोर्टल ऑन लाइन फूड्ज डॉट कॉम शुरू करने वाले मासिर निसार कहते हैं कि बदले हालात में इसे रोजगार का जरिया बनाकर न आप अकेले बल्कि 10 से 50 या फिर 100 लोगों तक को रोजगार दे सकते हैं।

इसके लिए बहुत संसाधन की भी जरूरत नहीं  है। सिर्फ चार स्तर पर काम करना होगा। पहले एक आईटी के जानकार साथ चाहिए होगा। दूसरा वेंडर तीसरा मार्केटिंग और चौथा डिलीवरी ब्वॉय की जरूरत होगी। आईटी के जानकार की मदद से ऑप ऑनलाइन अपने होम डिलीवरी पोर्टल का डिजाइन तैयार कराएंगे।

ऐसे होगा मुनाफा, निकलेगा खर्च-

इसके बाद आपको शहर के अलग-अलग क्षेत्र के किराना, दूध, फल-सब्जी और दवा दुकानदारों से संपर्क कर उसकी लिस्ट तैयार करनी होगी, जो पोर्टल पर अपडेट होगी। फिर जरूरत होगी पोर्टल के प्रचार-प्रसार की। इसके लिए डिजिटल प्लेटफार्म यानी व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, फेसबुक आदि सोशल मीडिया के विकल्प कम खर्च में ज्यादा कारगर साबित होंगे। डिलीवरी ब्यॉय डिलीवरी पर कमीशन या मासिक सैलरी पर मिल जाएंगे।

मासिर कहते हैं कि लॉकडाउन के दौरान हालात आपात वाले हैं इसलिए बहुत मुनाफे के बारे में नहीं सोचा गया लेकिन स्थिति सामान्य होने पर इस बिजनेस में मुनाफा भी मिलेगा। आप जिस वेंडर से संपर्क करेंगे वह नियमित ग्राहक होने की वजह से आपको सामान्य ग्राहक से कम दाम पर ही सामान मुहैया कराएगा । इसके अलावा प्रत्येक डिलीवरी पर 50 रुपये चार्ज मिलेगा।  

13 पोर्टल से एक हजार से अधिक लोगों को रोजगार: ज्वाइंज मजिस्ट्रेट
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गौरव सिंह सोगरवाल का कहना है कि लॉकडाउन शुरू होने के दो से तीन दिन के भीतर पहला होम डिलीवरी पोर्टल लांच कर दिया गया था। वर्तमान में 13 पोर्टल काम कर रहे हैं जिनसे एक हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है।

गर्मी को देखते ही खराब हो रहे बिजली के उपकरणों की मरम्मत के लिए 878 मैकेनिक भी इन पोर्टल से जोड़े गए हैं। प्रत्येक डिलीवरी ब्वॉय दिन भर में तीन सौ से चार सौ रुपये कमा लेता है यानी महीने के 12 हजार । ऐसे में यह रोजगार का एक ऐसा प्लेटफार्म है जो सिर्फ संचालन करने वालों को ही नहीं बल्कि सैकड़ों की संख्या में और भी लोगों को रोजगार मुहैया कराता है।

20 लाख से अधिक टर्नओवर पर रजिस्ट्रेशन जरूरी

वाणिज्य कर विभाग के टैक्स एडवोकेट एजाज अहमद ने बताया कि सालाना अगर 20 लाख रुपये से अधिक का अगर टर्नओवर है तो ऑनलाइन डिलीवरी पोर्टल के लिए जीएसटी में पंजीकरण जरूरी है। वर्ना सिर्फ विभाग में पंजीकरण होना चाहिए। इससे बैंक से लोन आदि में मदद मिल जाएगी। चूंकि पोर्टल में डिलीवरी ब्वॉय भी काम करेंगे इसलिए एक पंजीकरण श्रम विभाग और पीएफ विभाग में भी कराना होगा।

सरकार ने व्यापक योजना बनाई है, जिले में ही देंगे रोजगार: डीएम
डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि दूसरे प्रांतों से लौट रहे लोगों, मजदूरों, बेरोजगारों के लिए यूपी सरकार ने व्यापक योजना बनाई है। जिले और यूपी के भीतर ही नौकरियां और रोजगार मुहैया कराए जाएंगे। सरकार की कोशिश ज्यादा से ज्यादा रोजगार, गांवों में ही देने की है। इसके लिए रोजगार मेला, लोन मेला लगेगा। विशेषीकृत रोजगार के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी।

खुद को हुनरमंद बनाना जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक सुस्ती के इस दौर में अब वही लोग कमाई कर पाएंगे जो खुद को हुनरमंद बनाएंगे। सिर्फ डिग्री से अब काम नहीं चलेगा। काम आना भी चाहिए। कोई भी कंपनी अब किसी ऐसे को नौकरी पर नहीं रखेगी जिसे काम सिखाना पड़े। इसीलिए सरकार भी पहले प्रशिक्षण पर जोर दे रही है।
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इन विभागों में रोजगार की संभावनाएं

लॉकडाउन खुलते ही प्रदेश के एमएसएमई यानी लघु और सूक्ष्म उद्योग विभाग,  वन डिस्ट्रिस्ट वन प्रोडक्ट, एनआरएलएम, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, दीनदयाल उपाध्याय स्वरोजगार योजना, कौशल विकास मिशन, खादी ग्रामोद्योग तथा मनरेगा के माध्यम से रोजगार सृजन किए जाएंगे।

सबसे ज्यादा काम एमएसएमई और ओडीओपी के तहत मिलेगा। श्रमिकों और कामगारों को प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों के लिए स्कूल यूनिफार्म सिलने, स्वेटर बनाने जैसे कामों की ट्रेनिंग देने के बाद उन्हें मशीनें दी जाएंगी।  महिला स्वयंसेवी समूहों में महिलाओं को रोजगार देने की तैयारी है।

60 हजार से अधिक मजदूरों को दिलाया जा चुका है रोजगार: कमिश्नर
कमिश्नर जयंत नार्लिकर का कहना है कि लॉकडाउन के बीच उद्योग, विकास परियोजनाओं को भी फिर से पटरी पर लाने का प्रयास चल रहा है। सरकार की तरफ से 20 अप्रैल से मिली छूट के बाद अब तक मंडल में पांच हजार से अधिक छोटे-बड़े उद्योग और विकास परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं।

स्थानीय से लेकर दूसरे राज्यों से लौटे 60 हजार से अधिक मजदूरों को उनके गृह जनपद में ही रोजगार भी मुहैया कराया गया है। मंडल के चारो जिलों में विकास को और गति दी जाएगी। जो भी लोग दूसरे प्रांतों से आ रहे हैं उन्हें रोजगार मुहैया कराए जाने का प्रयास होगा। सभी डीएम को निर्देश दिए गए हैं कि वे एक विस्तृत कार्ययोजना बनाएं कि कितने लोगों को कहां-कहां रोजगार दिया जा सकता है।
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