एक वर्ष तक के मासूमों को जिला अस्पताल अथवा मेडिकल कॉलेज के सिक्ड न्यू बार्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) तक लाने के लिए 102 नंबर एंबुलेंस सेवा निशुल्क मिलेगी। शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए यह फैसला शासन की ओर से लिया गया है। इसे लेकर मिशन निदेशक अपर्णा उपाध्याय ने सीएमओ को पत्र भेज कर सुविधा को सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।
सीएमओ ने बताया कि 102 नंबर एंबुलेंस सेवा गर्भवती और शिशुओं के स्वास्थ्य के प्रति ही समर्पित है। जिले में 102 नंबर की 50 एंबुलेंस हैं। यह एंबुलेंस गर्भवती को एएनसी जांच, प्रसव के लिए अस्पताल लाने, नसबंदी के बाद घर छोड़ने और प्रसव के बाद घर छोड़ने की सेवा देती है।
बताया कि पत्र मिलने के बाद अब नवजात और शिशुओं के बीमार होने की दशा में एसएनसीयू तक निशुल्क पहुंचाया जाएगा। नोडल अधिकारी डॉ. नंद कुमार और एंबुलेंस सेवा के जिला समन्वयक अजय उपाध्याय को इसे लेकर निर्देशित किया गया है।
क्या है एसएनसीयू
सीएमओ ने बताया कि 34 सप्ताह से पहले पैदा, 1800 ग्राम से कम वजन, चार किलो वाले या 40 सप्ताह में पैदा बच्चों के लिए एसएनसीयू की सुविधा अनिवार्य है। इसके अलावा पेरीनेंटल एफीक्सिया, न्यूओनेटल जुआंडिस, रेस्प्रेटरी डिस्ट्रेस, रेफ्यूजल टू फीड, सेंट्रल क्यूनोसिस, एप्निया या गैस्पिंग, न्यूओनेटल कंवल्सन, बेबी ऑफ डायबिटिक मदर, डायरिया समेत 24 स्थितियों में नवजात का इलाज एसएनसीयू में किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर एक वर्ष से कम उम्र तक के शिशुओं को भी यहां भर्ती कर उनका इलाज किया जाता है।
एनसीयू नवजातों को समर्पित एक यूनिट होती है। जन्म लेने से 28 दिन तक बच्चे को नवजात माना जाता है। जन्म के तुरंत बाद अगर बच्चे में कोई भी स्वास्थ्य संबंधित दिक्कत है तो उसे भर्ती कर लिया जाता है। नवजात तब तक चिकित्सक व स्टॉफ की देखभाल में रहता है जब तक कि वह स्वस्थ न हो जाए। जिला महिला अस्पताल और बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इसकी सुविधा निशुल्क उपलब्ध है।