-गोरखनाथ मंदिर में कथा वाचक शांतनु ने दूसरे दिन सुनाई श्रद्धालुओं काे राम कथा
गोरखपुर। गुरु पूर्णिमा को लेकर गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में चल रही राम कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को कथा सुनाने हुए कथा वाचक ने कहा कि राम कथा का एक-एक अक्षर हमारे जीवन के पाप का नाश करता है।
उन्होंने सुनाया कि राम का चरित्र अनंत है। यह अनेक ग्रंथों में बताया गया है। उन्होंने कहा कि जीवन के प्रत्येक मार्ग में श्रद्धा और विश्वास आवश्यक है। श्रद्धा रहती है तो विश्वास फल देता है। महात्मा कम पढ़ा लिखा हो सकता है पर महात्मा की बुद्धि पर परमात्मा की विशेष कृपा होती है क्योंकि महात्मा में श्रद्धा और विश्वास ईश्वर के प्रति अटल होता है। विश्वास वट वृक्ष की तरह अटल होना चाहिए। भगवान दुष्टों के लिए कठोर और संतों के लिए कोमल होते हैं। उन्होंने बताया कि पार्वती जी जिज्ञासा स्वरूप है और सती जी संशय का स्वरूप है। जिज्ञासा का समाधान होता है और संशय का विनाश होता है।
गंगा में पवित्र होने के लिए चल कर जाना पड़ता है, परंतु यह राम कथा रूपी गंगा लोगों के घर घर तक जाकर उनका कल्याण करती है। सगुण और निर्गुण में कोई भेद नहीं है जो इसमें भेद मानते हैं उनको भगवान की प्राप्ति नहीं होती। भगवान भक्त के प्रेम के वशीभूत होकर निर्गुण से सगुण रूप में आ जाते हैं। जब हम भगवान की कृपा को संयोग मानते है तो कृपा की अनुभूति नहीं होती। कथा व्यास ने भगवान कार्तिकेय का जन्म, शिव पार्वती संवाद, नारद मोह, मनु सतरूपा साधना तथा भगवान राम के जन्म की कथा आदि का वर्णन किया। कथा के शुभारंभ व विश्राम के समय व्यास पीठ की आरती की गई।
इस अवसर पर प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ , काली बाड़ी के महंत रविंद्र दास, डॉ प्रदीप राव, डॉ प्रांगेश मिश्र, आचार्य बृजेश मणि मिश्र, डॉ रंगनाथ त्रिपाठी, दयानंद शर्मा, डॉ. दिग्विजय शुक्ल सहित काफी संख्या में विद्यापीठ के छात्र व श्रद्धालु मौजूद रहे।