गीता प्रेस के शताब्दी -वर्ष समापन समारोह के अवसर पर पुस्कत का विमोचन करते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सनातन साहित्य के प्रकाशन वाली संस्था गीता प्रेस से आध्यात्म और विकास की पटरी पर वंदे भारत को दौड़ाकर गोरक्षनगरी से बड़ा सियासी संदेश दिया है। पूरब से लोकसभा चुनाव की तैयारियों की शुरुआत करने वाले प्रधानमंत्री गीता प्रेस की महत्ता को बखूबी जानते हैं। उनके इस अंदाज को हिंदुत्व के समीकरण को धार देने से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने हिंदुत्व को आध्यात्म से जोड़ने के साथ वंदे भारत और रेलवे स्टेशन की पुनर्विकास योजना के जरिये लोगों का दिल जीतने का प्रयास किया है। संकेतों के जरिए ही सही, लेकिन देश की सियासत में भाजपा की भावी रणनीति का भी संकेत दे दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने गीता प्रेस के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का भी संकेत दिया। काशी से केदारनाथ और महाकाल से अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण को जोड़कर हिंदुत्व को धार देने का प्रयास किया है। पीएम मोदी ने वंदे भारत को देश के मध्य वर्ग की सुविधाओं और सहूलियत की नई उड़ान बताकर बड़े वर्ग को साधने का प्रयास किया है। अंग्रेजी हुकूमत के हाथों देश के पुस्तकालयों को नष्ट करने और रामायण-गीता के बिना जीवन की परिकल्पना न होने का मुद्दा उठाकर परोक्ष रूप से हर हिंदू घर से जुड़ने का प्रयास किया।
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बड़े ही सलीके से प्रधानमंत्री मोदी ने जता दिया कि लोकसभा चुनाव में आस्था और विकास, भाजपा का प्रमुख एजेंडा रहेगा। लाल किले पर देश के विकास के साथ विरासत को सहेजने की बात कहने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार देकर इसका एक उदाहरण भी पेश किया। इस बात का जिक्र खुद प्रधानमंत्री ने गीता प्रेस में किया। देश पर संकट के दौरान संतों और ऋषियों द्वारा सदैव मार्गदर्शन देने की बात कहकर उन्होंने भगवा से जुड़ाव को प्रदर्शित किया। प्रधानमंत्री, गीता प्रेस में भले ही गीता का सार सुना रहे थे, लेकिन उनके एक-एक शब्द के राजनीतिक निहितार्थ थे।
नाम नहीं लिए पर निशाने पर रही कांग्रेस
प्रधानमंत्री मोदी ने गीता प्रेस में करीब 18 मिनट के अपने संबोधन में किसी भी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया, लेकिन प्रत्यक्ष रूप से उनके निशाने पर कांग्रेस ही रही। तभी तो उन्होंने राजपथ की जगह कर्तव्य पथ का जिक्र करके पिछली सरकारों में देश की विरासत की उपेक्षा करने का सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि हम अंग्रेजी हुकूमत की परंपरा पर आगे बढ़ रहे थे, हमने उस परंपरा को बदलने का काम किया है।