इस बार होलिका दहन दो मार्च को व रंग भरी होली चार मार्च को मनाई जाएगी। तीन को स्नान-दान की पूर्णिमा होगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, होलिका पूजन और दहन पूर्णिमा तिथि में भद्रा रहित समय में रात्रि में किया जाता है। इस वर्ष पूर्णिमा तिथि में भद्रा का वास होने से विशेष स्थिति बन रही है।
भद्रा दो मार्च को शाम 5:18 बजे से आरंभ होकर तीन मार्च सुबह 4:56 बजे तक रहेगी। ऐसे में पूरी रात भद्रा और पूर्णिमा दोनों का संयोग रहेगा। गोरखनाथ मंदिर संस्कृत विद्यापीठ स्नातकोत्तर महाविद्यालय के वेद विभागाध्यक्ष डॉ. रंगनाथ त्रिपाठी ने बताया कि शास्त्रों में भद्रा के समय होलिका दहन वर्जित माना गया है।