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अमर उजाला पड़ताल: ऑफलाइन हो या ऑनलाइन, ड्राइविंग लाइसेंस चाहिए तो दलालों के पास जाइए

Thu, 11 May 2023 12:41 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) विजय कुमार सिंह ने कहा कि लर्निंग लाइसेंस की व्यवस्था ऑनलाइन और पूरी तरह से पारदर्शी है, इसमें सॉफ्टवेयर ही आवेदक को पास या फेल करता है, बिचौलिए आवेदकों को पास करा रहे हैं, तो ये जांच का विषय है, अगर ऐसा कोई मामला संज्ञान में आता है तो इससे परिवहन विभाग के मुख्यालय को अवगत कराया जाएगा।
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गोरखपुर में बिचौलिए बनवा रहे अस्थायी लाइसेंस। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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आरटीओ की ओर से ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत बनाए जा रहे लर्निंग लाइसेंस में दलालों ने सेंधमारी कर ली है। बुधवार को अमर उजाला के रिपोर्टर ने सिविल लाइंस स्थित पुराने आरटीओ कार्यालय के पास एक साइबर कैफे में बैठे बिचौलिए से लाइेंसस बनवाने की बात की, तो परिवहन विभाग के व्यवस्था पारदर्शी होने के दावे की पोल खुल गई। दलाल के साथ बातचीत की रिकॉर्डिंग अमर उजाला के पास मौजूद है।

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दरअसल, परिवहन विभाग ने लर्निंग लाइसेंस के आवेदकों को घर बैठे परीक्षा देने की सुविधा दी है, लेकिन 50 फीसदी से अधिक आवेदकों के आवेदन घर पर परीक्षा देने के बाद निरस्त हो जा रहे हैं। ऐसा कैमरे के हिलने-डुलने और परीक्षा के दौरान आवाज होने से हो रहा है। इससे उन्हें फेल मान लिया जाता है।

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फेल होने के बाद लर्निंग लाइसेंस के आवेदक परीक्षा देने के लिए पुराने आरटीओ कार्यालय के आसपास स्थित साइबर कैफे पहुंचते हैं। जहां पहले से बैठे बिचौलिए परीक्षा देने आए आवेदकों को फंसाते हैं और परीक्षा पास कराने का दावा करते हैं, लेकिन इसके बदले में आवेदकों से 1500 से 2000 रुपये देने की मांग करते हैं। लर्निंग लाइसेंस की परीक्षा पास होने के लिए अधिकतर आवेदक बिचौलिए के जाल में फंस जाते हैं।

परीक्षा के समय बिचौलिए बड़ी साफगोई से बैठकर सवालों को हल करा देते हैं। उन्हें ऐसे सवालों की लिस्ट आरटीओ कार्यालय से ही मिल जाती है। सवाल एक ही तरह के होते हैं, जिसे बदल-बदल कर पूछा जाता है। यह खेल हर दिन पुराने आरटीओ कार्यालय यानी अब नए एसएसपी कार्यालय के बाहर खुलेआम चलता रहता है। इस खेल में विभाग के लोगों की भी मिलीभगत है।
 

ऐसे हुई बातचीत

रिपोर्टर : भईया, अस्थायी लाइसेंस बन जाएगा?
बिचौलिया : हां बन जाएगा ।
रिपोर्टर : कितने पैसे लगेंगे?
बिचौलिया : 1500 रुपये
रिपोर्टर : अस्थायी लाइसेंस की फीस तो 350 रुपये हैं,
बिचौलिया : 350 रुपये सिर्फ सरकारी शुल्क है और 1500 रुपये अतिरिक्त देंगे तो आवेदन के साथ ही आपको पास भी करा दिया जाएगा। अस्थायी लाइसेंस की परीक्षा सिर्फ औपचारिकता के लिए देनी पड़ेगी।
रिपोर्टर : आवेदन में क्या-क्या दस्तावेज लगेंगे?
बिचौलिया : सिर्फ आधार कार्ड देना होगा।
रिपोर्टर : लाइसेंस कैसे बनेगा?
बिचौलिया : आप पैसा दीजिए वह हमारा सिरदर्द है। लाइसेंस आपको मिल जाएगा।

 
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ये है लर्निंग लाइसेंस बनने की प्रक्रिया

संभागीय निरीक्षक राघव कुशवाहा ने बताया कि लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के साथ ही आवेदक के मोबाईल पर टेस्ट के लिए एक लिंक और ओटीपी आ जाएगा। लिंक पर क्लिक करने के साथ ही उसमें ओटीपी डालना होगा।

ओटीपी डालने के बाद 15 वैकल्पिक सवाल पूछे जाएंगे। आवेदक को पास होने के लिए न्यूनतम नौ मिनट में नौ सही सवाल करने होते हैं। आवेदक के पास होने के बाद लर्निंग लाइसेंस आवेदक के मोबाइल पर भेज दिया जाता है।



बताया कि फेल होने के बाद उत्तीर्ण होने के लिए अभ्यर्थी को एक आवेदन पर तीन बार टेस्ट देने का मौका मिलेगा। इसके बाद भी आवेदक पास नहीं हुआ तो उसे दूसरी बार ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है।

संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) विजय कुमार सिंह ने कहा कि लर्निंग लाइसेंस की व्यवस्था ऑनलाइन और पूरी तरह से पारदर्शी है, इसमें सॉफ्टवेयर ही आवेदक को पास या फेल करता है, बिचौलिए आवेदकों को पास करा रहे हैं, तो ये जांच का विषय है, अगर ऐसा कोई मामला संज्ञान में आता है तो इससे परिवहन विभाग के मुख्यालय को अवगत कराया जाएगा।
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