आईटीआई कार्यकर्ता उग्रसेन सिंह ने वर्ष 2019 में राजभवन को पत्र लिखकर सेवा प्रदाता फर्म पर कर्मचारियों के पीएफ अंशदान जमा कराने में घोटाले का आरोप लगाया था। जिसमें कहा गया था कि 248 कर्मचारियों के वेतन का भुगतान जेजेज इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी प्राइवेट लिमिटेड को विवि प्रशासन ने किया है, एजेंसी ने 191 कर्मचरियों का ही पीएफ अंशदान जमा किया है। इस आरोप को संज्ञान में लेते हुए राजभवन में जांच का आदेश दिया गया। कमेटी भी बनी, लेकिन जांच पूरी नहीं हुई और मामला दबा दिया गया।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने कहा कि वर्ष 2006 से आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के पीएफ अंशदान को जमा करने में गड़बड़ी की गई है। पूरे प्रकरण की जांच होगी। इसमें रजिस्ट्रार और वित्त अधिकारी को जांच कर एजेंसी को भुगतान करना चाहिए। लेकिन, ऐसा नहीं किया गया। साढ़े तीन हजार कटौती करके एजेंसी, कर्मचारी को मानदेय भुगतान कर रही है।
कटौती की राशि कहां जा रही है, इसका कोई हिसाब नहीं है। प्राथमिक तौर पर 10 करोड़ से ज्यादा हेरफेर सामने आया है। पीएफ कमिश्नर को भी पत्र भेजकर रिकॉर्ड मांगा जाएगा। जो भी इसमें दोषी होगा उससे रिकवरी की जाएगी।
मानदेय की राशि
| श्रेणी |
तय मानदेय |
भुगतान |
| कुशल कर्मचारी |
13350 |
10220 |
| अकुशल कर्मचारी |
11250 |
7833 |
रुपये में