-कोई सरकार में ऊंची पहुंच का कर रहा दावा, तो कोई खुद को बता रहा उच्च डिग्रीधारी
-मनोरोग विशेषज्ञ बोले- ऐसे लोग बाइपोलर डिसऑर्डर का शिकार
गोरखपुर। गोला निवासी 26 साल के युवक को परिजन बीआरडी मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। मनोचिकित्सक ने जब केस स्टडी शुरू की तो वह खुद को भगवान बताते हुए अपने पास विशेष शक्तियां होने की बात कहने लगा। युवक ने कहा कि उसके पास एमबीबीएस व बीटेक की डिग्री भी है। शुरुआती जांच में उसमें मेनिया नामक मानसिक विकार की पुष्टि हुई और इलाज शुरु हुआ।
इसी तरह कुशीनगर से आए युवक से जब मनोरोग विशेषज्ञ ने बात शुरू की तो उसने कहा कि सरकार में उसकी ऊंची पहुंच है और वह किसी की भी नौकरी लगवा सकता है। एक कॉल से सारी व्यवस्था हो जाएगी। इत्मिनान से उसे सुनने के बाद उसकी जांच कराई गई तो उसे भी मेनिया का शिकार पाया गया। इलाज से उसमें सुधार हुआ है।
चिकित्सकों के मुताबिक, ये दो मामले तो महज बानगी हैं। पहले ऐसे मरीज कभी-कभार आते थे, अब प्रतिदिन चार से पांच मरीज इसी प्रकार के लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में ऐसे मरीजों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है। सुखद ये है कि सही समय पर सही इलाज से यह मानसिक विकार ठीक भी हो रहा है।
मेनिया में उत्साह, चिड़चिड़ापन और ऊर्जा चरम पर होता है
विभाग के डॉ. तपस आइच ने बताया कि मेनिया एक मानसिक स्थिति है जो अक्सर बाइपोलर डिसऑर्डर का हिस्सा होती है। इसमें व्यक्ति अत्यधिक उत्साहित, चिड़चिड़ा और ऊर्जा से भरा रहता है। उसे नींद की आवश्यकता कम महसूस होती है और वह तेजी से बोलता तथा सोचता है। कई बार वह बिना सोचे-समझे जोखिम भरे निर्णय भी ले सकता है। यह सामान्य उत्साह नहीं, बल्कि एक चिकित्सकीय स्थिति है, जिसका इलाज दवाओं और काउंसिलिंग से संभव है।
इन लक्षणों पर रखें नजर, दिखें तो डॉक्टरों को दिखाएं
- अत्यधिक ऊर्जा और बेचैनी
- बिना कारण अत्यधिक खुशी या चिड़चिड़ापन
- नींद की आवश्यकता में कमी
- तेजी से बोलना और विचारों का तेज प्रवाह
- असामान्य आत्मविश्वास
- जोखिम भरे फैसले लेना
मानसिक स्वास्थ्य के लिए ये जरूरी
- नियमित नींद और पर्याप्त आराम
- योग और ध्यान के माध्यम से तनाव नियंत्रण
- समय पर दवा और डॉक्टर की सलाह
- परिवार और सामाजिक जुड़ाव बनाए रखना
- नशे से दूरी
समय पर पहचान और उपचार से दूर होगा ये विकार
मेनिया एक गंभीर मानसिक स्थिति है। इसमें अत्यधिक ऊर्जा, कम नींद, तेजी से बोलना और जोखिम भरे निर्णय लेने की प्रवृत्ति देखी जाती है। समय पर पहचान और उपचार से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। परिजन को चाहिए कि लक्षण दिखने पर तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें क्योंकि देर करने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
- डॉ. तपस कुमार आइच, मनोरोग विभाग, बीआरडी मेडिकल कॉलेज