- बीआरडी मेडिकल काॅलेज में ऑनलाइन भी कटती है ओपीडी की पर्ची
- अस्पताल में पेयजल, सफाई समेत अन्य सुविधाओं में भी हो रही बढ़ोतरी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मरीजों को ओपीडी पर्ची बनवाने के लिए लाइन लगाकर धक्का खाने की जरूरत नहीं है, बल्कि मोबाइल एप पर ऑनलाइन बुकिंग कराकर भी पर्चा बनवाया जा सकता है। इसके लिए बस मरीज के पास आधार कार्ड और मोबाइल फोन नंबर होना जरूरी है।
मेडिकल कॉलेज के नेहरू चिकित्सालय में ओपीडी में हर दिन करीब 3500 मरीज आते हैं। पहले ओपीडी की पर्ची बनवानी होती है। इसके लिए भीड़ से जूझना पड़ता है। दोपहर एक बजे तक पर्ची बनती है। ऐसे में अगर 11 बजे के बाद मरीज ओपीडी में पर्ची बनवाने पहुंचते हैं तो अक्सर उन्हें लौटना पड़ता है। क्योंकि जब तक उनका नंबर आता है, पर्ची काउंटर का समय खत्म हो चुका होता है।
इसीलिए पर्ची काउंटर पर अब मोबाइल एप से भी पर्ची बनवाने की सुविधा शुरू हो गई है। इसका बड़ा फायदा यह भी है कि मरीज का पूरा विवरण पोर्टल पर अपडेट हो जाएगा, जिससे कि उसके इलाज की हिस्ट्री आसानी से मिल सकेगी।
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इस तरह बन रही है एप से पर्ची
सबसे पहले अपने एंड्रॉयड मोबाइल फोन के गूगल प्ले स्टोर में जाकर एप डाउनलोड करना होगा। इस एप से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगी। इसे दर्ज करने के बाद मरीज को आधार में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। इसके बाद आधार कार्ड में दर्ज मरीज का नाम, उम्र, लिंग, पिता का नाम, पता खुद दर्ज हो जाएगा। इसके बाद आपको एड्रेस चुनना होगा। इसे चुनते ही आप का विवरण दर्ज हो जाएगा। ओपीडी की पर्ची प्राप्त करने के लिए काउंटर पर लगाए गए क्यूआर कोड को स्कैन करना होगा। इसके बाद टोकन नंबर मिलेगा। काउंटर पर टोकन नंबर बताकर एक रुपये देकर पर्ची मिल जाएगी।
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चार जगह लगाए जा रहे वाटर एटीएम
पर्ची काउंटर पर मोबाइल एप की सुविधा बढ़ाने के साथ-साथ अस्पताल परिसर में शुद्ध पेयजल के लिए चार वाटर एटीएम भी लगाए जा रहे हैं। इनका काम जल्दी ही पूरा हो जाएगा। इससे यहां भर्ती मरीज व उनके तीमारदारों को पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। इसके अलावा दवा स्टोर के लिए भी अलग से एक कमरा बनवाया जा रहा है, जिससे जरूरत भर की दवाएं सुरक्षित तरीके से स्टोर की जा सकें।
कोट-
अस्पताल में मरीजों के इलाज और तीमारदारों की सहूलियत के लिए कई परिवर्तन किए जा रहे हैं। एप के माध्यम से पर्ची कटने से भीड़ में धक्का खाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दवाओं की भरपूर उपलब्धता बनाए रखने के लिए स्टोर की क्षमता भी बढ़ाई जा रही है। इसके अलावा पेयजल, सफाई, सुरक्षा आदि की बेहतर व्यवस्था के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।
- डॉ. राजेश कुमार राय, एसआईसी, नेहरू चिकित्सालय बीआरडी मेडिकल कॉलेज