जिला आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी डॉ. प्रभाशंकर मल्ल ने बताया कि भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव की वजह से महिलाएं मां नहीं बन पाती हैं। ऐसी स्थिति में उत्तर बस्ति चिकित्सा पद्धति निसंतान महिलाओं के लिए एक वरदान है। इस पद्धति में इलाज काफी सस्ता है। जबकि, आईवीएफ में इलाज काफी महंगा है। आईवीएफ तकनीक में करीब दो से तीन लाख रुपये का खर्च आता है। इसमें 40 से 50 हजार रुपये का खर्च है। बताया कि आयुर्वेद कॉलेज में जल्द ही इस पद्धति से निसंतान महिलाओं का इलाज शुरू किया जाएगा। लाल डिग्गी के पास 50 बेड का अस्पताल बनाया जा रहा है। इसमें मरीजों को भर्ती करने की भी सुविधा होगी।
नए साल से चलेगी आयुर्वेद विश्वविद्यालय में ओपीडी
आयुर्वेद विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार आरबी सिंह ने बताया कि भटहट के पिपरी में बन रहे आयुर्वेद विश्वविद्यालय में दिसंबर माह से ही ओपीडी शुरू होनी थी, लेकिन काम कर रही संस्था ने अब तक एफिलेशन सेंटर का निर्माण पूरा नहीं किया है। उम्मीद जताई है कि दिसंबर माह में निर्माण पूरा कर विश्वविद्यालय को एफिलेशन सेंटर का भवन हैंड ओवर कर दिया जाएगा। इसके बाद नए साल से आयुर्वेद विश्वविद्यालय में 10 विभागों की ओपीडी शुरू की जाएगी। इसमें आठ आयुर्वेद, एक होम्योपैथी और एक यूनानी विभाग की ओपीडी चलेगी। इसके अलावा नए साल से ही पंचकर्म और नेचुरोपैथी विभाग भी शुरू होगा। पंचकर्म में पांच तरीकों से गंभीर रोगों का इलाज किया जाएगा।