गोरखपुर में कोरोना महामारी के बीच पिछले 10 माह से बंद बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जल्द ही सामान्य ओपीडी भी शुरू हो जाएगी। इस संबंध में शासन से कॉलेज प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं। शासन से मिले निर्देश के बाद कॉलेज प्रशासन ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि एक सप्ताह के अंदर इसकी शुरुआत हो जाएगी। इसके बाद से मरीजों को इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा।
जानकारी के मुताबिक, मेडिकल कॉलेज सहित प्रदेश के समस्त मेडिकल कॉलेजों और समस्त चिकित्सा विश्वविद्यालयों में पढ़ाई संग सामान्य ओपीडी बंद कर दी गई थी। लेकिन, सप्ताह भर से प्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या लगातार कम होती दिख रही है। इसके मद्देनजर प्रदेश सरकार के सचिव जीएस प्रियदर्शी ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज समेत प्रदेश के सभी चिकित्सा विश्वविद्यालयों और मेडिकल कॉलेजों को पत्र भेजकर सामान्य ओपीडी जल्द शुरू कर देने के निर्देश दिए हैं।
कोविड के मरीज बढ़ें तो रखें व्यवस्था
यह भी निर्देश दिया गया है कि अगर कोविड मरीजों की संख्या अचानक बढ़ती है, तो ऐसी स्थिति में कोविड के अलग वार्ड बने रहने चाहिए। जिससे कि मरीजों को भर्ती करने में कोई परेशानी न हो। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अब भी 300 बेड के कोविड वार्ड संचालित हो रहे हैं, जबकि 200 बेड के कोविड वार्ड को 10 दिन पूर्व ही बंद कर दिया गया है।
अभी रजिस्ट्रेशन कराने के बाद हो रहा इलाज
ओपीडी में दिखाने के लिए एक दिन पहले रजिस्ट्रेशन कराना पड़ रहा है। इसके बाद उन्हें 24 घंटे बाद अगली तिथि में देखने के लिए बुलाया जा रहा है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने कहा कि जल्द ही व्यवस्था बनाकर सामान्य ओपीडी की शुरुआत की जाएगी। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। शासन से मिले निर्देशों का पूरा पालन किया जाएगा।
ईएनटी में पीजी की चार सीटें बढ़ने की उम्मीद
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में नाक-कान-गला (ईएनटी) रोग विभाग में पीजी की चार सीटें बढ़ने की उम्मीदें है। नेशनल मेडिकल काउंसिल की ओर से ईएसआइ मेडिकल कॉलेज, गुडबर्ग, कर्नाटक से आए डॉ. अनिल कुमार डोडामणि ने विभाग का निरीक्षण शुक्रवार को किया। डॉ. अनिल ने ओपीडी, मरीजों के भर्ती होने की व्यवस्था, संसाधन, डॉक्टरों, मशीनों और बेडों की उपलब्धता देखी। प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि निरीक्षण के बाद उन्होंने संतोष जताया। इसलिए उम्मीद है कि शीघ्र ही चार सीटें कॉलेज को मिल जाएंगी। इससे विशेषज्ञ डॉक्टर बढ़ेंगे। इसका लाभ मरीजों को मिलेगा।