नोएडा के एसएसपी वैभव कृष्ण के गोपनीय पत्र के लीक होने के बाद मचे हंगामे की जांच की आंच गोरखपुर तक पहुंच सकती है। मामले में जिस चंदन राय का नाम उछला है, उसका गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर के कई कथित पत्रकारों से संपर्क है। उसके पोर्टल से जुड़े एक कथित पत्रकार सत्येंद्र पर गोरखनाथ थाने में कुछ दिन पहले ही केस भी दर्ज हुआ है।
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वहीं, आरोपों से घिरे एसपी बांदा गणेश साहा लंबे समय तक गोरखपुर में एसपी सिटी, एसपी नार्थ और फिर देवरिया में एएसपी के पद पर तैनात रहे हैं। आरोपों से घिरे एक और आईपीएस व एसपी एसटीएफ राजीव मिश्रा की तैनाती भी एसपी कुशीनगर के रूप में रही है। महराजगंज के एसपी रहे हिमांशु कुमार भी आरोपों के घेरे में है। वह सपा सरकार में महराजगंज के एसपी थे।
सरकार बदली तो सोशल मीडिया पर टिप्पणी को लेकर विवादों में आए। इस मामले में हिमांशु कुमार को निलंबित किया गया था। अब वह सुल्तानपुर के एसपी हैं। अभी इन आरोपों की जांच हो रही। माना जा रहा है कि जैसे-जैसे परतें खुलेंगी, वैसे-वैसे इसकी आंच गोरखपुर या फिर आसपास के जिलों तक पहुंचेगी।
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पूर्वांचल के रसूखदार व्यक्ति का नाम भी उछला
ट्रांसफर, पोस्टिंग के इस खेल में पूर्वांचल के एक रसूखदार व्यक्ति का नाम भी उछला है। कहा जा रहा है कि पॉवर में आने के बाद इस व्यक्ति ने फिलहाल पूर्वांचल के लोगों से आंखें फेर ली है। पूर्वांचल से जो भी सिफारिश जाती है, उस पर वह गौर नहीं करते। उन्होंने अपना पूरा ध्यान पश्चिमी यूपी पर केंद्रित कर रखा है। आरोप है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ट्रांसफर, पोस्टिंग के खेल में लंबा पैसा मिलता है। ऐसा पुलिस अफसरों की व्हाट्स एप चैटिंग में भी कहा गया है। अफसरों की बातचीत में इन महाशय का नाम खुलकर लिया जा रहा है, लेकिन ऑन रिकॉर्ड कोई बोलने को तैयार नहीं है।
.. शराब कांड की जांच में दोषी फिर भी मिला पद
एसपी एसटीएफ राजीव मिश्रा की पहुंच का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुशीनगर के एसपी रहने के दौरान थानेदार की गाड़ी से बरामद शराब मामले में उनके खिलाफ एडीजी, आईजी रैंक के अफसरों ने मुख्यालय को पत्र लिखा था, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इस मामले में कई पुलिस वालों के नाम सामने आए थे, लेकिन आरोपितों को हटाने के कुछ समय बाद ही नई तैनाती दे दी गई थी। आला अफसरों ने इस आईपीएस के खिलाफ लिखा-पढ़ी की थी, लेकिन बावजूद इसके इन्हें महत्वपूर्ण पद दे दिया गया।
दरअसल, पूरा मामला एसएसपी नोएडा वैभव कृष्ण के कथित अश्लील वीडियो के बाद से सामने आया। सोशल मीडिया पर पुलिस अफसरों के बीच तेजी से वायरल किए गए वीडियो में एसएसपी को अभद्र साबित करने की कोशिश की गई।
इसके बाद ही नोएडा के एसएसपी वैभव कृष्ण का वह गोपनीय पत्र भी वायरल हो गया, जिसमें यूपी के अलग-अलग जिलों में कप्तानी, थानेदारी के लिए रुपये की सेटिंग का आरोप लगा।
पत्र में हवाला दिया गया है कि चंदन व कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर आईपीएस अजय पाल शर्मा, सुधीर सिंह, गणेश साहा, राजीव मिश्रा, हिमांशु कुमार ट्रांसफर, पोस्टिंग का रैकेट चला रहे थे। इस रैकेट के कुछ लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया है। पत्र के लीक होने के बाद पूरा मामला गरमा गया। अब सोशल मीडिया पर वायरल पत्र और वीडियो की सच्चाई जांची जा रही है।