- बीआरडी मेडिकल कॉलेज में वार्ड नंबर दो के सामने बने नए बर्न वार्ड में 6 बेड का आईसीयू
- पुराने बर्न वार्ड में अभी 18 मरीजों को ही भर्ती करने की सुविधा
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेहरू अस्पताल में 26 बेड का नया बर्न वार्ड बनकर तैयार हो गया है। इसमें 6 बेड का डेडीकेटेड आईसीयू है। उपकरण व और सहायक स्टॉफ की व्यवस्था महीने भर में होने की उम्मीद है। इसके बाद वार्ड को उपयोग में लाया जाएगा। अभी पुराने बर्न वार्ड में केवल 18 मरीजों को भर्ती करने की सुविधा है। नया वार्ड शुरू होने पर बर्निंग के 44 मरीजों को भर्ती किया जा सकेगा।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेहरू अस्पताल में अभी गोरखपुर-बस्ती मंडल के अलावा पड़ोसी प्रांत बिहार और नेपाल तक के मरीज आते हैं। अलग-अलग बीमारियों के करीब एक हजार मरीज भर्ती किए जाते हैं।
अस्पताल के बर्न वार्ड में वैसे तो 56 बेड की जगह है, लेकिन संसाधनों की कमी और मरीजों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए केवल 18 मरीज ही भर्ती किए जाते हैं। मरीजों की सुविधा के लिए पिछले साल शासन ने 10 करोड़ रुपये से नया बर्न वार्ड बनाने की मंजूरी दी थी।
नया वार्ड मेडिसिन इमरजेंसी वार्ड नंबर 11 के ऊपर व वार्ड नंबर दो के सामने बना है। बर्न वार्ड के प्रभारी डॉ. नीरज नाथानी ने बताया कि नए वार्ड में 26 बेड होंगे, जिसमें से 6 बेड डेडीकेटेड आईसीयू का होगा जो अभी तक मेडिकल कॉलेज में नहीं था।
बताया की नए वार्ड को जलने के केस में इलाज के दौरान बरती जाने वाली अन्य सभी सावधानियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। उपकरणों की खरीद के लिए भी बजट उपलब्ध है। केवल सपोर्टिंग मेडिकल स्टॉफ की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होनी बाकी है। महीने भर में इसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी।
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मरीजों को नहीं जाना पड़ेगा निजी अस्पताल
बर्न वार्ड में डेडिकेटेड आईसीयू का फायदा यह होगा कि गंभीर मरीजों को लखनऊ या निजी अस्पतालों में नहीं ले जाना पड़ेगा। इसके अलावा बेडों की संख्या बढ़कर 44 हो जाएगी, जिससे अधिक मरीजों को भर्ती किया जा सकेगा। इसका लाभ गोरखपुर समेत आसपास के अन्य जिलों के मरीजों को भी मिलेगा।
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कोट-
बर्न वार्ड में सुविधाएं बढ़ाने के लिए ही नए वार्ड का निर्माण कराया गया है। प्रयास है कि जल्द इसके लिए जरूरी उपकरण व अन्य स्टॉफ की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करके इसे शुरू कर दिया जाए, जिससे कि मरीजों का सही उपचार हो सके। डेडिकेटेड आईसीयू होने से गंभीर मरीजों के इलाज में भी मदद मिलेगी।
- डॉ. गणेश कुमार, प्राचार्य, बीआरडी मेडिकल कॉलेज