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Navratri 2023: इस नवरात्र हाथी पर आएंगी माता, मुर्गा पर होगा गमन

Tue, 10 Oct 2023 02:44 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

मान्यता के अनुसार, अगर नवरात्र सोमवार या रविवार से शुरू हो रही है तो मां दुर्गा का वाहन हाथी होता है। इस बार माता का आगमन हाथी पर हो रहा है ये अधिक वर्षा का संकेत देता है। इसे समृद्धि का सूचक माना जाता है। वहीं माता का गमन मुर्गा पर होगा, जो रोग की वृद्धि करने वाला होगा।
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Shardiya Navratri 2023 - फोटो : Amarujala
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विस्तार
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शारदीय नवरात्र की शुरुआत 15 अक्तूबर से हो रही है। वहीं नवरात्र का समापन 23 अक्तूबर को होगा। कलश स्थापना के साथ श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत और पूजन-अर्चन से माता को प्रसन्न करेंगे।

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मान्यता के अनुसार, अगर नवरात्र सोमवार या रविवार से शुरू हो रही है तो मां दुर्गा का वाहन हाथी होता है। इस बार माता का आगमन हाथी पर हो रहा है ये अधिक वर्षा का संकेत देता है। इसे समृद्धि का सूचक माना जाता है। वहीं माता का गमन मुर्गा पर होगा, जो रोग की वृद्धि करने वाला होगा।

वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, 15 अक्तूबर को अश्विन मास प्रतिपदा तिथि का मान संपूर्ण दिन और रात 11 बजकर 52 मिनट तक है। चित्रा नक्षत्र शाम छह बजकर 43 मिनट तक, वैधृति योग भी दिन में 11 बजकर 55 मिनट तक है। कलश स्थापना के लिए अभिजित मुहूर्त सर्वोत्तम रहेगा। इस दिन अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 38 मिनट से 12 बजकर 23 मिनट तक है। इसके अलावा सुबह छह बजकर 16 मिनट से शाम पांच बजकर 44 मिनट के बीच कभी भी किया जा सकता है।
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ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, नवरात्र में प्रारंभ के दिन के अलावा सप्तमी, अष्टमी और नवमी का भी विशेष महत्व है। सप्तमी के रात्रि में अष्टमी का योग होने से इसी दिन महानिशा पूजा का आयोजन होता है। महाष्टमी तिथि को देवी के निमित्त व्रत और सविधि पूजन किया जाता है और महानवमी के दिन पूजन और व्रत की परिपूर्ति के लिए हवन इत्यादि करके समापन किया जाता है।

21 को महानिशा पूजा 23 को होगा कन्या पूजन
ज्योतिचार्य पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, शारदीय नवरात्र की सप्तमी तिथि 21 अक्तूबर को है। इस दिन सप्तमी तिथि का मान शाम सात बजकर 27 मिनट तक पश्चात अष्टमी है। अर्धरात्रि में अष्टमी होने से महानिशा पूजन और देवी के निमित्त बलिदानादिक क्रिया इसी दिन संपन्न की जाएगी।

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महा अष्टमी 22 अक्तूबर को है। इस दिन अष्टमी तिथि का मान शाम पांच बजकर 25 मिनट तक पश्चात नवमी तिथि है। जो श्रद्धालु अंतिम दिन व्रत और पूजन करते हैं, वे इसी दिन व्रत करेंगे। महानवमी विचार 23 अक्तूबर को है। इस दिन नवमी तिथि का मान दोपहर बाद तीन बजकर 10 मिनट तक है। इस दिन कन्याओं का पूजन और हवन संपन्न किया जाएगा।

जो व्यक्ति पूरे नवरात्र में उपवास और व्रत नहीं कर पाते हैं, वे नवरात्र के आदि में अथवा अंतिम दिन व्रत करते हैं। नौ दिन व्रत रखने वाले 22 अक्तूबर को व्रत का पारण करेंगे। दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन भी इसी दिन होगा।

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शारदीय नवरात्र का कार्यक्रम
  • 15 अक्तूबर-मां शैलपुत्री पूजा व घटस्थापना
  • 16 अक्तूबर-मां ब्रह्मचारिणी पूजा
  • 17 अक्तूबर-मां चंद्रघंटा पूजा
  • 18 अक्तूबर-मां कुष्मांडा पूजा
  • 19 अक्तूबर-मां स्कंदमाता पूजा
  • 20 अक्तूबर-मां कात्यायनी पूजा
  • 21 अक्तूबर-मां कालरात्रि पूजा
  • 22 अक्तूबर-मां महागौरी पूजा,
  • 23 अक्तूबर-मां सिद्धिदात्री पूजा
  • 24 अक्तूबर-विजयदशमी
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