उत्तर प्रदेश के देवरिया में स्थित नागरी प्रचारिणी सभा जिले में साहित्यिक गतिविधियों के साथ ही हिंदी भाषा के उन्नति एवं प्रचार-प्रसार का प्रमुख केंद्र है। आजादी के पूर्व से ही यह गोष्ठियों, सभा, समारोहों, तुलसी जयंती पर छात्र-छात्राओं के बीच विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से राषट्रभाषा के विकास एवं उन्नयन के लिए कार्य कर रहा है। आजादी के पूर्व से ही यह साहित्यकारों, कलमकारों की चर्चा-परिचर्चा एवं समाज को दिशा देने का कार्य भी कर रहा है।
वर्ष 1915 से 1920 का वह कालखंड जब देश पराधीनता की बेड़ियों में जकड़ा था, राष्ट्र और राष्ट्रभाषा, स्वदेश, स्वभाषा, एवं स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग की बात करना राष्ट्रद्रोह और अपराध माना जाता था, उन परिस्थितियों में जनपद के गणमान्य नागरिकों, साहित्यकारों एवं राष्ट्रभाषा प्रेमियों ने नागरी प्रचारिणी सभा, देवरिया की स्थापना की। उद्देश्य यह था कि राष्ट्रभाषा हिंदी का प्रचार-प्रसार व संवर्धन हो।
इस पुनीत उद्देश्य की प्राप्ति के लिए जनसहयोग के जरिए शहर के मध्य में वर्तमान में कोतवाली रोड के पास लगभग 50 एअर भूमि क्रय कर जनहित में आर्यभाषा, पुस्तकालय एवं वाचनालय की स्थापना की गई। वर्ष 1915 से ही यह सभा निरंतर राष्ट्रभाषा हिंदी एवं उसके प्रचार-प्रसार एवं संरक्षण के लिए पुस्तकालय, वाचनालय व विभिन्न गोष्ठियों, सभा, सम्मान समारोहों, पुस्तक विमोचन के माध्यम से अपने उद्देश्य की पूर्ति कर रहा है।