गोरखपुर नगर निगम के निर्माण विभाग से सेवानिवृत्त होने के 10 महीने बाद भी चुन्नीलाल नाम का एक बेलदार नौकरी करता रहा। जानकारी मिलने के बाद कर्मचारी को सेवानिवृत्त कर दिया गया है। वहीं इस मामले में नगर निगम के अधिष्ठान के एक कर्मचारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
बेलदार के पद पर कार्यरत चुन्नीलाल पिछले साल दिसंबर में ही सेवानिवृत्त हो गए थे। बताया जा रहा है कि उस दौरान से अब तक वह नगर निगम के एक जेई के घर पर काम करते रहे। जेई ही कर्मचारी की हाजिरी लगवाते थे।
सेवानिवृत्त होने के 10 महीने बाद भी नौकरी करने की जानकारी सामने आने के बाद भी नगर निगम के अफसर और कर्मचारी खुद को बचाने में जुटे रहे। कोई कहता कि यह अधिष्ठान की गलती है तो कोई निर्माण विभाग को इसके लिए जिम्मेदार बताकर खुद को पाक-साफ बताता।
जानकारी के मुताबिक, चुन्नीलाल की तनख्वाह 40 हजार रुपये से ज्यादा है। यानी सेवानिवृत्ति के बाद चुन्नीलाल अब तक चार लाख रुपये वेतन ले चुके हैं। अब नगर निगम के अफसर रिकवरी की तैयारी में जुटे हुए हैं।
नगर निगम मुख्य अभियंता सुरेश चंद ने कहा कि चुन्नीलाल का प्रकरण संज्ञान में आया है। अधिष्ठान के बाबू से स्पष्टीकरण मांगा गया है। चुन्नीलाल के सेवानिवृत्त होने के बाद लिए गए तनख्वाह की वसूली की जाएगी। मामले की जांच की जा रही है। जो भी दोषी मिलेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।