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मायोकार्डिटिस: कोरोना से फेफड़े-दिल की मांसपेशियां हुईं कमजोर..युवा भी रहें अलर्ट

Wed, 20 Dec 2023 05:51 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

कोरोना से संक्रमित हुए लोगों में सबसे अधिक असर फेफड़े पर पड़ा। इससे सांस लेने में दिक्कत होने लगी। ऑक्सीजन लेवल कम होने पर शरीर के सभी अंगों तक रक्त पहुंचाने के लिए हृदय को अधिक क्षमता से पंप करना पड़ा। इस अतिरिक्त दबाव के चलते हृदय की मांसपेशियाें में सूजन आ गया।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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युवा खिलाड़ी और बाकी युवाओं की हार्टअटैक से मौत ने लोगों को हिला दिया है। जानकारों का कहना है कि कई मामलों में कोरोना भी इन घटनाओं की वजह रही है। संक्रमित रहे करीब 20 फीसदी लोग मायोकार्डिटिस से पीड़ित हैं। इस बीमारी में हृदय की मांसपेशी (मायोकार्डियम) में सूजन हो जाती है।

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इस कारण सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ और हृदय की धड़कन अनियमित हो जाती है। ऐसे मामलों में नियमित इलाज और लंबे विश्राम से मरीज पूरी तरह से ठीक हो सकता है। इसमें लापरवाही हार्ट अटैक का कारण बन सकता है, इसलिए खिलाड़ी हों या तंदरुस्त युवा, जरा भी खतरा महसूस करें तो जांच तुरंत करवाएं।

कोरोना से संक्रमित हुए लोगों में सबसे अधिक असर फेफड़े पर पड़ा। इससे सांस लेने में दिक्कत होने लगी। ऑक्सीजन लेवल कम होने पर शरीर के सभी अंगों तक रक्त पहुंचाने के लिए हृदय को अधिक क्षमता से पंप करना पड़ा। इस अतिरिक्त दबाव के चलते हृदय की मांसपेशियाें में सूजन आ गया। सूजन के कारण हुई बीमारी मायोकार्डिटिस हृदय को कमजोर कर देती है। इस वजह से शरीर के बाकी हिस्सों को पर्याप्त रक्त नहीं मिल पाता है। इससे हृदय रक्त का थक्का बनने पर स्ट्रोक या दिल का दौरा पड़ सकता है।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के छाती एवं श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ. अश्विनी मिश्रा बताते हैं कि कोरोना संक्रमित मरीजों के फेफड़े कमजोर हो चुके हैं। उन्हें इसके लिए चलते इंफ्लुएंजा समेत कई अन्य बीमारियों की शिकायत होती है। ऐसे मरीजों को संक्रमण से बचाव के लिए विशेष सावधानी बरतनी होती है। इंफ्लुएंजा से बचाव के लिए हर साल एक इंजेक्शन भी लगवाना पड़ता है।

हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव गुप्ता बताते हैं कि ऐसे मामलों में लापरवाही भारी पड़ सकती है। इसलिए जिन मरीजों का फेफड़ा संक्रमित है, या कोविड के बाद सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्क्त आदि की समस्या है तो उन्हें बिना अचानक अधिक परिश्रम, दौड़ना, ऊंचाई पर चढ़ने आदि का कार्य नहीं करना चाहिए। जिन मरीजों के हृदय एक बार कमजोर हो चुके हैं, उन्हें लंबे समय तक और कुछ परिस्थितियों में आजीवन दवा खानी पड़ सकती है। इसलिए बिना डॉक्टर से सलाह लिए दवा बंद न करें।

 
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अगर हृदय कमजोर है तो ये न करें
  • अचानक अधिक परिश्रम या कोई ऐसा खेल जिसमें अधिक दौड़ने पड़े उसमें शामिल न हों।
  • अगर सांस लेने में दिक्कत है तो बिना डॉक्टरी सलाह लिए दवा बंद न करें।
  • अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए विशेषज्ञ की निगरानी में फिजियो थेरेपी कराएं
ये काम जरूर करें
  • दर्द के कारणों की जानकारी के लिए डॉक्टर की सलाह लेकर ईसीजी, एंजियोग्राफी जरूर कराएं।
  • शुरू के छह महीने तक शरीर को पूरा आराम दें
  • जब भी अधिक परिश्रम का काम करना हो तो अपनी बीमारी का ध्यान रखें।
  • कुछ मामलों में आजीवन दवा लेनी होती है, इसलिए अपने मन से दवा बंद न करें।
  • दवा की डोज में परिवर्तन से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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