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गोरखपुर: ‘मेरा संसार उजड़ा, पति के अंतिम दर्शन करा दीजिए’, दम्माम में जान गंवाने वाले कमलेश के परिवार की गुहार

Sat, 24 Oct 2026 02:19 PM IST
अनुराग रंजन अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर

सार

कमलेश पांडेय के भाई मुकेश पांडेय भी भाई का शव भारत लाने और परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने बताया कि शुक्रवार शाम बांसगांव के सांसद एवं केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान से मुलाकात कर शव भारत लाने में मदद मांगी गई। परिवार की आर्थिक सहायता का मुद्दा भी उठाया गया, लेकिन अभी तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है।
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दम्माम एयरपोर्ट हादसा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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दुख की इस घड़ी में हर आंख नम है। जिस घर में कभी हंसी-खुशी की आवाजें गूंजती थीं, वहां आज अपने को खोने का मातम पसरा है। दम्माम एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले में जान गंवाने वाले कमलेश पांडेय के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पति की मौत की खबर ने पत्नी सुनीता देवी को भीतर तक तोड़ दिया है। रोते-बिलखते हुए वह कहती हैं कि मेरा संसार उजड़ गया। मेरे पति का अंतिम दर्शन करा दीजिए। मेरी बेटी के डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह गया।

सुनीता देवी की आंखों में पति को आखिरी बार देखने की आस है, लेकिन शव भारत कब पहुंचेगा, इसकी जानकारी अब तक परिवार को नहीं मिल सकी है। पति के बिछड़ने का गम और उनके अंतिम दर्शन नहीं कर पाने की पीड़ा परिवार को पल-पल तोड़ रही है।

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बेटियों के सिर से उठा पिता का साया - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

जिस उम्र में पिता का हाथ थामकर सपने देखना था, उसी उम्र में मासूम बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया। 14 साल की तनवी और 10 साल की तान्या के लिए पिता का बिछड़ना ऐसा दर्द है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। जिस पिता की उंगली थामकर दोनों बहनें जिंदगी की राह पर आगे बढ़ना चाहती थीं, अब उसी पिता के लौटने का इंतजार हमेशा के लिए अधूरा रह गया। घर में मां सुनीता देवी के आंसू और परिवार में पसरा मातम दोनों बच्चियों के बचपन की खुशियां छीन ले गया है। वहीं, पत्नी की आंखों में पति के अंतिम दर्शन की आस है, तो बेटियों के जीवन में पिता की कमी कभी पूरी न हो पाने वाला खालीपन बन गई है। परिवार के सपनों को पूरा करने के लिए घर से दूर गए कमलेश पांडेय अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। पीछे छूट गई हैं उनकी यादें, अधूरे सपने और अपनों की सिसकियां। जिस पिता के कंधों पर बैठकर उन्होंने दुनिया देखी होगी, उसी पिता को आखिरी बार देखने के लिए परिवार को उनके पार्थिव शरीर के भारत आने का इंतजार है।

नम आंखों से पिता की गुहार- बेटे का शव घर आ जाए, बस यही आस

बेटे की मौत की खबर ने पिता हरिचंद्र पांडेय को भीतर तक तोड़ दिया है। जिस बेटे को अपने कंधों पर बैठाकर बड़ा किया, आज उसी के अंतिम दर्शन के लिए उनकी आंखें तरस रही हैं। नम आंखों से हरिचंद्र बताते हैं कि 22 अक्तूबर की शाम मोबाइल पर बेटे की मौत की सूचना मिली। यह खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अब बस एक ही इच्छा है कि बेटे का पार्थिव शरीर घर आ जाए, ताकि उसे आखिरी बार देख सकें और अंतिम विदाई दे सकें। हरिचंद्र पांडेय के मुताबिक, बेटे का शव भारत लाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले दो दिन में भारतीय दूतावास से चार बार बात हो चुकी है। दूतावास की ओर से जो भी दस्तावेज मांगे गए, उन्हें व्हाट्सऐप और ई-मेल के माध्यम से भेज दिया गया है। इसके बावजूद अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि बेटे का शव कब तक भारत पहुंचेगा।

 

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मदद की आस में परिवार, अब सरकार से उम्मीद

कमलेश पांडेय के भाई मुकेश पांडेय भी भाई का शव भारत लाने और परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने बताया कि शुक्रवार शाम बांसगांव के सांसद एवं केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान से मुलाकात कर शव भारत लाने में मदद मांगी गई। परिवार की आर्थिक सहायता का मुद्दा भी उठाया गया, लेकिन अभी तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। एक तरफ पिता बेटे के अंतिम दर्शन के लिए व्याकुल हैं, तो दूसरी तरफ भाई परिवार को इस मुश्किल घड़ी से उबारने की कोशिश में जुटा है। पूरे परिवार की निगाहें अब सरकार और प्रशासन पर टिकी हैं। परिजन का कहना है कि उनकी बस इतनी सी आस है कि कमलेश का पार्थिव शरीर जल्द घर पहुंचे और परिवार उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दे सके।
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