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इस ईद पर नहीं लगेंगे गले, दूर से ही कहेंगे 'ईद मुबारक'

Wed, 20 May 2020 02:52 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

  • मुस्लिम समाज करेगा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन
  • एक दूसरे के घर जाकर सिवईं  लुत्फ उठाने से भी लोग करेंगे परहेज
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फाइल फोटो। - फोटो : pti
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विस्तार
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‘ईद का दिन है गले अब तो मिल ले जालिम, रस्म-ए-दुनिया भी है, मौका भी है, दस्तूर भी है’- जनाब कमर बदायूंनी का यह शेर इस बार की ईद के मुफीद नहीं है। कोरोना महामारी के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए लोग इस बार एक दूसरे से गले नहीं मिलेंगे और न ही हाथ मिलाकर ईद की मुबारकबाद देंगे। लोग सोशल मीडिया सहित दूरसंचार के साधनों का इस्तेमाल करेंगे। एक दूसरे के घर जाकर सिवईं व अन्य पकवान का लुत्फ उठाने से भी लोग परहेज करेंगे।
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जनता इंटर कॉलेज चरगांवा के लेक्चरर मो. कलीम अशरफ खान ने कहा कि ईद की खुशी जरूर मनाएंगे लेकिन बेहद सादगी के साथ। घरों में ईद की नमाज की जगह चार रकात नमाज चाश्त की पढ़ेंगे। फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मुबारकबाद पेश करेंगे। दूसरों के घरों पर जाने से परहेज करेंगे।
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बड़गो के व्यवसायी मोहसिन खान ने कहा कि इस ईद पर हम सब सब्र का इजहार कर कोरोना से निजात की दुआ मांगेंगे। इस बार हमारा एक ही लक्ष्य है अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए जरूरतमंदों की मदद करना। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए ईद घर पर ही मनाएंगे।

रहमतनगर व्यवसायी अली गजनफर शाह ने कहा कि ईद को लेकर उत्साह तो जरूर है लेकिन लॉकडाउन का पालन करते हुए खुद, परिवार वालों व समाज के लोगों के स्वास्थ्य का भी ख्याल रखना है। ईद सादगी से मनानी है। यह कपड़ों का नहीं अपनों का त्यौहार है।

बहरामपुर के तबरेज खान ने कहा कि इस बार ईद सादगी वाली  होगी लेकिन उत्साह में कोई कमी नहीं होगी। कोरोना का प्रकोप जल्द खत्म हो बस यही दुआ है। जरूरतमंदों का ख्याल रखें। गले मिलें न मिलें दिल से दिल जरूर मिलना चाहिए। मुबारकबाद देने के लिए सोशल मीडिया को सहारा लेंगे।
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