‘ईद का दिन है गले अब तो मिल ले जालिम, रस्म-ए-दुनिया भी है, मौका भी है, दस्तूर भी है’- जनाब कमर बदायूंनी का यह शेर इस बार की ईद के मुफीद नहीं है। कोरोना महामारी के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए लोग इस बार एक दूसरे से गले नहीं मिलेंगे और न ही हाथ मिलाकर ईद की मुबारकबाद देंगे। लोग सोशल मीडिया सहित दूरसंचार के साधनों का इस्तेमाल करेंगे। एक दूसरे के घर जाकर सिवईं व अन्य पकवान का लुत्फ उठाने से भी लोग परहेज करेंगे।
जनता इंटर कॉलेज चरगांवा के लेक्चरर मो. कलीम अशरफ खान ने कहा कि ईद की खुशी जरूर मनाएंगे लेकिन बेहद सादगी के साथ। घरों में ईद की नमाज की जगह चार रकात नमाज चाश्त की पढ़ेंगे। फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मुबारकबाद पेश करेंगे। दूसरों के घरों पर जाने से परहेज करेंगे।