उत्तर प्रदेश के देवरिया शहर की सफाई व्यवस्था राम भरोसे चल रही है। जिन कर्मचारियों की नियुक्ति वार्डों की सफाई के लिए हुई है, वह नेता और अधिकारियों के बंगले पर ड्यूटी कर रहे हैं। कोई अधिकारियों के कमरों में झाडू-पोछा कर रहा तो कोई फुलवारी संवारने की जिम्मेदारी निभा रहा है। कुछ सफाई कर्मी जनप्रतिनिधियों के आवास पर कार्यकर्ताओं को पानी भी पिला रहे हैं।
अधिकारियों के बंगले पर सफाई कर्मियों की नियम विरुद्ध तैनाती का सिलसिला वर्षों से चला आ रहा है। साल भर पहले बड़े अधिकारियों के बंगले पर पंचायतराज विभाग के सफाई कर्मी तैनात रहते थे। कोई साहब बंगले की साफ-सफाई करता था तो कोई उनकी गाड़ी में अर्दली बनकर घूमता था। शासन के सख्त निर्देश के बाद अधिकारियों के बंगले से पंचायतराज विभाग के सफाईकर्मी हटा दिए गए।
अब उनकी जगह नगर पालिका के सफाई कर्मी लगा दिए गए हैं। यह दिन भर साहब के घर की बेगारी करते हैं। लेकिन नगर पालिका वार्डों की सफाई के नाम पर मानदेय भुगतान करती है। सफाई कर्मियों की छीना- झपटी में नेता भी पीछे नहीं हैं। नेताओं की बेगारी के लिए भी पालिका ने उनके घर सफाई कर्मी तैनात किया है जिनकी हाजिरी वार्ड में सफाई के नाम पर बनती है।
सफाई श्रमिकों की कमी से जूझ रही नगर पालिका
शहर की नगर पालिका पहले से ही सफाई श्रमिकों की कमी से जूझ रही है। 525 की जगह पालिका के पास 394 सफाई श्रमिक हैं। जिनमें करीब डेढ़ दर्जन अधिकारी और नेताओं के बंगले पर तैनात कर दिए गए हैं। इन्हें भी शहर की सफाई व्यवस्था का हिस्सा मानें तो पालिका को 131 सफाई श्रमिकों की दरकार है। बीते दिनों बोर्ड की बैठक में नगर पालिका ने इसके लिए प्रस्ताव रखा था लेकिन सदन से मंजूरी नहीं मिल सकी।
सफाई श्रमिकों की आवश्यकता
448 वार्डों की सफाई के लिए
10 रात्रि कालीन सफाई के लिए
14 श्रमिक नाला गैंग के लिए
28 सुपरवाइजर
25 चालक
यह है वर्तमान व्यवस्था
394 सफाई श्रमिक हैं नगर पालिका के पास
28 सुपरवाइजर हैं
25 चालक
08 कोविड ड्यूटी में तैनात हैं
10 रात्रिकालीन सफाई में
14 नाला गैंग में हैं तैनात
309 वार्डों में तैनात हैं
निकाय प्रभारी अधिकारी सीआरओ अमृत लाल वृंद ने बताया कि अधिकारी व नेताओं के यहां सफाईकर्मी तैनात होने की जानकारी मुझे नहीं है। नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों की तैनाती रजिस्टर का निरीक्षण करने के बाद ही इसके बारे में कुछ बता पाऊंगा।