किसी व्यक्ति की मृत्यु के प्रमाणपत्र का दुरुपयोग न हो इसलिए नगर निगम ने मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया को सख्त कर दिया है। अब यदि किसी व्यक्ति की मौत के एक साल बाद मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने के लिए आवेदन किया जाएगा तो नगर निगम उसे राजस्व विभाग के पास भेजेगा। राजस्व विभाग की ओर से जारी जांच रिपोर्ट के आधार पर ही निगम मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करेगा।
दरअसल, हाल ही में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें नगर निगम की ओर से जारी मृत्यु प्रमाणपत्र का गलत इस्तेमाल किया गया। ज्यादातर मामले संपत्ति, जमीन आदि से संबंधित हैं। कुछ ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जिसमें करीब डेढ़ दशक पहले हुई किसी की मौत का मृत्यु प्रमाणपत्र मौत की वास्तविक तारीख से अलग बनवा लिया गया।
एक ऐसा भी मामला सामने आया, जिसमें एक महिला की मौत के करीब चार साल बाद का मृत्यु प्रमाणपत्र बनवा लिया गया। जबकि उस महिला की मौत करीब एक दशक पहले हो चुकी थी और उसने मौत के कुछ ही दिन पहले जमीन की रजिस्ट्री की थी।