अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज देने की घोषणा के बाद सभी की निगाहें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले विस्तृत ब्योरे पर टिकी हुई थी। जहां उद्योगपतियों ने इसे एमएसएमई सेक्टर के लिए लॉक डाउन की मार से उबरने के लिए सरकार की ओर से उठाया गया एक बेहतर कदम करार दिया वहीं आर्थिक विशेषज्ञों ने इसे देश की अर्थव्यवस्था को बूस्टर डोज की तरह बताया। उद्योगपतियों के साथ आर्थिक विशेषज्ञों का भी मानना है कि 20 लाख करोड रुपए के इस आर्थिक पैकेज से देश की अर्थव्यवस्था फिर से ना सिर्फ पटरी पर आ जाएगी बल्कि आने वाले कुछ महीनों में रफ्तार भी पकड़ लेगी। उद्योगपति बोले :::: लॉकडाउन की वजह से एमएसएमई सेक्टर के सामने बहुत बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई है। उनके सामने न सिर्फ पूंजी की कमी है बल्कि लॉक डाउन के वजह से बंद पड़े उद्योगों को फिर से चलाने के लिए नए सिरे से कवायद करने की जरूरत पड़ रही है। वित्त मंत्री की ओर से आर्थिक पैकेज का जो ब्यौरा दिया गया है वह काफी हद तक उद्योगों के लिए राहत भरा कदम साबित होगा। इसमें जो 200 करोड रुपए के टेंडर को ग्लोबल नहीं करने की बात कही गई है इससे देश की कंपनियों को बढ़ावा मिलेगा। लेकिन सरकार को एमएसएमई सेक्टर के लिए भी टेंडर के मामले में अलग कैटेगरी बनाना चाहिए। एसके अग्रवाल पूर्व अध्यक्ष चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज –-------- वित्त मंत्री जो आर्थिक पैकेज का विश्लेषणात्मक विवरण दिया है उससे स्पष्ट है कि केंद्र सरकार एमएसएमई सेक्टर को और ज्यादा मजबूत बनाना चाह रही है। लेकिन सरकार को बड़े उद्योगों के लिए भी पैकेज की घोषणा करनी चाहिए। साथ ही नए निवेश को कैसे आकर्षित किया जाए इस दिशा में भी कदम उठाने की आवश्यकता है। जब नए निवेश होंगे तब ही प्रधानमंत्री का स्वदेशी का कंसेप्ट ना सिर्फ आगे बढ़ेगा बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ साबित होगा। निखिल जालान निदेशक अंकुर उद्योग –--- प्रधानमंत्री की आर्थिक पैकेज की घोषणा के बाद एमएसएमई सेक्टर को जिस तरह की राहत की उम्मीद थी वित्त मंत्री के द्वारा प्रस्तुत ब्योरे से कुछ हद तक निराशा ही हाथ लगी है। लॉक डाउन वजह से आर्थिक रूप से परेशानी झेल रहे उद्योगपति वित्तीय सहायता की उम्मीद लगाए हुए थे। लेकिन केंद्र सरकार ने लोन देकर उद्योगों को राहत प्रदान करने की कोशिश की है। वर्तमान समय में कोई भी उद्योगपति लोन लेने की बजाए अपने माली हालत को सुधारने की कोशिश करेगा। सुधांशु टिबड़ेवाल, निदेशक, श्री सिद्धेश्वरी पॉली पैक –-::::;;;;;;;;;::: प्रधानमंत्री ने जो राहत पैकेज की घोषणा की थी वित्त मंत्री ने उसको अमलीजामा पहनाया है। केंद्र सरकार ने लॉक डाउन के वजह से आर्थिक रूप से परेशान उद्योगपतियों को काफी हद तक राहत प्रदान कर दी है। एमएसएमई के हर एक सेक्टर को छूने की कोशिश की गई है। वही बिना कॉलेटरल बैंकों की ओर से 1 साल के लिए ब्याज में छूट के साथ लोन का प्रावधान बंद पड़े उद्योगों के लिए जीवनदायिनी साबित होगा। उमेश छापड़िया, निदेशक सर्वोत्तम फीड्स प्राइवेट लिमिटेड :::::;;;; लॉक डाउन की वजह से अधिकांश उद्योग या तो बंद पड़े हैं या फिर उनमें नाम मात्र का उत्पादन हो रहा है। इस वजह से उद्योगों के सामने पूंजी की काफी ज्यादा कमी हो गई है। कोई भी उद्योग लोन से ही चलता है। ऐसे में उद्योगों को बिना किसी गारंटी के 1 साल तक ब्याज मुक्त लोन लोन की सुविधा प्रदान करने से उनकी वित्तीय संकट खत्म हो जाएगी। और उन्हें अपने उद्योगों को फिर से रफ्तार पकड़ाने में काफी मदद मिलेगी। संदीप अग्रवाल निदेशक आईवी फ्लुएड्स -------- इंडस्ट्री पैसे की कमी से जूझ रहे हैं। किराया लेबर का पेमेंट आदि जैसी वित्तीय समस्या उनके सामने मुंह बाए खड़ी है। ऐसे में किसी भी बिजनेस हाउस के लिए बैंक ही एकमात्र सहारा होता है। केंद्र सरकार ने जो आर्थिक पैकेज की घोषणा की है उसमें एमएसएमई सेक्टर के लिए जिस तरह से बैंकों की ओर से काफी बड़ी रकम लोन के रूप में बिना गारंटी का जो प्रावधान किया गया है इससे उद्योग फिर से गति पकड़ सकेंगे। शिरीष अग्रवाल प्रोपराइटर हाई पॉलिप्रिंट -------- भले ही उद्योगों को डायरेक्ट बेनिफिट नहीं दिया गया है लेकिन 20 लाख करोड़ रुपए का आर्थिक पैकेज उद्योगों को नई गति प्रदान करेगा। उद्योगों के सामने सबसे बड़ा संकट बैंकों से मिलने वाले लोन को लेकर होता है। आर्थिक पैकेज के रूप में जिस तरह से एमएसएमई सेक्टर को ब्याज रहित करीब 1 साल का लोन देने का जो प्रस्ताव केंद्र सरकार के द्वारा दिया गया है इससे ना सिर्फ पुराने उद्योगों को संचालित करने में गति मिलेगी बल्कि नए उद्योग भी स्थापित होंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बाजार में पूंजी का सरकुलेशन बढ़ेगा। इससे देश की ठहरी हुई अर्थव्यवस्था न सिर्फ चल पड़ेगी बल्कि आने वाले साल डेढ़ साल में रफ्तार भी पकड़ लेगी। आरएन सिंह निदेशक वेल्ड इंडिया