दिवंगत सांसद भले ही आजमगढ़ के रहने वाले थे लेकिन उनका गोरखपुर से गहरा नाता था। जब भी गोरखपुर आते थे तो गुरु गोरखनाथ का दर्शन-पूजन करते थे। उनकी भगवान शिव में गहरी आस्था थी।
कद्दावर नेताओं में शुमार अमर सिंह के कई खास मित्र गोरखपुर में हैं। उनका पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह और सहारा प्रमुख सुब्रत राय सहारा से खास लगाव था।
पदयात्रा निकाली थी
सपा से मनमुटाव के बाद अमर सिंह ने पूर्वांचल यात्रा निकाली थी। इसका मुख्य केंद्र गोरखपुर था। सुभाष चौराहे पर बड़ी जनसभा हुई थी। इसकी अगुवाई किसान मोर्चे के अंशुमान सिंह ने किया था।
दिवंगत नेता कई बार गोरखपुर आए थे। 2017 में गोरखपुर के लिटरेरी फेस्ट में भी आना हुआ था। सेंट एंड्रयूज कॉलेज परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में वेबाक राय रखी थी।
वह आखिरी बार 2018 में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के प्रबुद्ध प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपक मिश्रा के भाई वैभव मिश्रा की सगाई में आए थे। तब बयान दिया था कि जिन्ना के प्रशंसक देशभक्त नहीं हो सकते हैं।
राममनोहर लोहिया और पंडित दीनदयाल उपाध्याय की सोच को एक जैसा बताया था। दीपक मिश्रा का कहना है कि अमर सिंह रिश्ता निभाना जानते थे। भगवान शिव में आस्था रखने वाले अमर सिंह का निधन भी सावन में हुआ। वह अध्ययनशील व्यक्ति थे। तबीयत खराब थी, फिर गोरखपुर आए। दुर्भाग्य रहा कि वही अंतिम दौरा हो गया।
दिवंगत अमर सिंह के साथ बैठे गैलेंट इस्पात के प्रबंध निदेशक चंद्रप्रकाश अग्रवाल।
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दिवंगत नेता का गैलेंट इस्पात लिमिटेड के प्रबंध निदेशक चंद्रप्रकाश अग्रवाल से खास लगाव था। इसकी पुष्टि खुद चंद्र प्रकाश अग्रवाल ने की और कहा कि अमर सिंह जिंदादिल, मददगार इंसान थे।
जब यूपी औद्योगिक विकास बोर्ड के अध्यक्ष थे तो गोरखपुर में गैलेंट समूह का प्रतिष्ठान स्थापित कराने में बड़ा योगदान दिया। कहा जाए तो उन्हीं की वजह से 2005-2006 के दौरान गोरखपुर में गैलेंट इस्पात की स्थापना हुई। गोरखपुर के लिटरेरी फेस्ट में आए तो हमारे घर पर ही रुके थे। तमाम मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
सिंगापुर इलाज कराने जा रहे थे तो भी नई दिल्ली में मुलाकात हुई थी। व्हील चेयर पर बैठकर भी मुस्कुरा रहे थे। कहा कि चंद्र प्रकाश जी तीन महीने में इलाज कराके आ जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हो सका। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। उनका व्यक्तिगत स्नेह मिलता था।