गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आर्थिक सलाहकार डॉ. केवी राजू की मौजूदगी में गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र (एमजीकेवीके) चौकमाफी, पीपीगंज एवं विश्वविद्यालय के बीच बुधवार को करार हुआ। कुल सचिव और एमपी शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष प्रो. यूपी सिंह ने अनुबंध पर हस्ताक्षर किए।
अनुबंध के तहत छह फॉर्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (एफपीओ) कंपनियों को पूर्ण विकसित कंपनियों के रूप में तैयार किया जाएगा। इसमें विश्वविद्यालय का बिजनेस इनक्यूबेटर सेल मदद करेगा। ये एफपीओ कंपनियां बीज उत्पादन, मत्स्य, पशुपालन, जैव-उर्वरक, गुड़ उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण और बेमौसमी सब्जियों के उत्पादन में काम करेंगी। इस अवसर पर प्रो. अजेय गुप्ता, प्रो. अजय सिंह, प्रो. मानवेंद्र सिंह, डॉ. प्रदीप राव, महेंद्र कुमार सिंह और दोनों संस्थानों के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
स्थान और बुनियादी सहयोग करेंगे विश्वविद्यालय
अनुबंध के मुताबिक गोरखपुर विश्वविद्यालय इन स्टार्टअप को कार्यालय, स्थान और बुनियादी सहायता प्रदान करेगा। कंपनियों के विकसित होने पर इन्हें दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया जाएगा। बिजनेस इनक्यूबेटर सेल इन स्टार्टअप के इनक्यूबेशन पीरियड (उष्मायन अवधि) के लिए कुछ न्यूनतम शुल्क लेगा।
अनुबंध के मुताबिक इन कंपनियों का टर्नओवर एक करोड़ रुपये को पार कर जाएगा, जबकि व्यक्तिगत किसान शेयर धारकों का योगदान सिर्फ एक हजार रुपये प्रति किसान होगा। स्मॉल फॉर्मर्स एग्रीबिजनेस कंसोर्टियम (एसएफएसी), नाबार्ड, राज्य सरकार आदि से धनराशि प्राप्त की जाएगी। विश्वविद्यालय द्वारा इन कंपनियों को स्थापित करने के लिए एक निश्चित धनराशि शुल्क के रूप में ली जाएगी।