बाल विकास विभाग में मुख्य सेविका के पद पर कार्यरत कुमकुम मिश्रा उन माताओं में शुमार हैं जो महज सपने नहीं देखती हैं, बल्कि उन्हें पूरा करने में अपना जीजान लगा देती है। तभी तो 8 घंटे की नौकरी के बाद तीन बच्चों और गृहस्थी को संभाला।
ज्यादा समय भले बच्चों को नहीं दे पाती थीं, मगर बच्चों की शिक्षा पर पूरा ध्यान रखा। मां की मेहनत बच्चों के लिए प्रेरणा बनी तो बेटी श्रेया मिश्रा ने पीसीएस क्वालिफाई कर मां के उस सपने को पूरा किया जिसे कभी कुमकुम ने अपने बच्चों के लिए सोचा था।
जगन्नाथपुर में पति परशुराम मिश्रा के साथ रहने वाली कुमकुम मिश्रा ने बताया कि अपने काम के दौरान उन्हें कई बार अपने वरिष्ठ अधिकारियों के सामने जाना पड़ता है। उनके काम करने का अंदाज, सौम्य व्यवहार, सम्मान और विषम परिस्थितयों को संभालने की क्षमता हमेशा ही आकर्षित करती रही है।