सुमरेसागर रोड पर जर्जर मकान।
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अलीनगर और पुर्दिलपुर इलाके में कई जर्जर भवन हैं। शहर के सबसे भीड़भाड़ वाले इलाके में शुमार अलीनगर में रोज करीब 25 से 30 हजार लोगों की आवाजाही होती है। लेकिन हर बार बरसात में अलर्ट जारी कर सिर्फ खानापूर्ति कर ली जाती है। इन भवनों में दुकान किए लोगों को भी किसी तरह का डर नहीं है। अलीनगर चौराहे के बीच में ही एक जर्जर भवन में करीब 15 से 20 दुकानें है। यहां दुकान करने वाले लोग बेफ्रिकी से व्यापार कर रहे हैं। उनका कहना है कि मकान ऊपर से दिखने में जर्जर है, जबकि नींव इसकी बहुत मजबूत है। उन्हें किसी प्रकार का डर नहीं लगता। यही हाल, थवई का पुल, बक्शीपुर, जगन्नाथपुर मोहल्ले का है।
मुझे तो डर नहीं लगता है
दुकान में लोहे की पिलर लगा है। इसी पर पूरा भवन टिका है। ऐसे में भवन ऊपर से जर्जर तो है, लेकिन असुरक्षित नहीं है। मुझे तो भूकंप या आंधी में गिरने का डर नहीं लगता है। : अभिषेक गुप्ता, दुकानदार, अलीनगर
जर्जर हो गया है पर गिरेगा नहीं
घर के ऊपर का हिस्सा जर्जर जरूर हो गया है, लेकिन इसके नीचे लोहे गाटर लगा हुआ है। इससे इसकी नींव बहुत मजबूत है। बारिश के दौरान इसके गिरने का डर नहीं है। : एसके गुप्ता, दुकानदार थवई का पुल
हादसे के बाद भी प्रशासन जागेगा। हमारे रिश्तेदार का घर भी यहां है। डर लगता है कि अगर कभी तेज हवा या आंधी में हादसा हुआ और भवन गिरा तो रिश्तेदार के परिवार काे नुकसान हो सकता है। : भोला, विजय चौक
किसी को चिंता ही नहीं
नगर निगम या जिला प्रशासन को जर्जर भवन की चिंता ही नहीं। लंबे समय से चौराहे का भवन जर्जर है। चौराहे पर दुर्गा पूजा होती है। भीड़ भी खूब होती है। अगर यह गिर गया तो बड़े हादसे से इन्कार नहीं किया जा सकता है। : दिवाकर, अलहदादपुर
नगर निगम के मुख्य अभियंता संजय चौहान ने कहा कि जर्जर मकानों में किराएदारी का विवाद है, ऐसे में सीधे नगर निगम कुछ नहीं कर सकता है। एक बार फिर से सर्वे करवाकर देखा जाएगा कि उन विवादों को खत्म किया गया या नहीं। रिपोर्ट के बाद उसी अनुसार कार्रवाई करते हुए भवनों में रहने वालों को उसे खाली करवाने का निर्देश दिया जाएगा।