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पितरों को मोक्ष की प्राप्ति कराती है ये एकादशी, इस विधि से पूजा करने पर मिलता है फल

Sun, 20 Dec 2020 04:37 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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मोक्षदा एकादशी। - फोटो : अमर उजाला।
साल 2020 की अंतिम एकादशी, मोक्षदा एकादशी 25 दिसंबर को मनाई जाएगी। मान्यताओं के अनुसार जो कोई भी श्रद्धालु इस व्रत को विधि-विधान से करता है तो उसके पूजन-अर्चन और व्रत का फल उनके पितरों का मिलता है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
 
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एकादशी 2020 - फोटो : अमर उजाला
हिंदू धर्म में एकादशी का महत्व बहुत अधिक माना गया है। हर वर्ष 24 एकादशियां होती हैं। लेकिन जिस वर्ष अधिकमास आता है उस वर्ष एकादशी 26 हो जाती हैं। वर्ष 2020 की आखिरी एकादशी 25 दिसंबर को है। मार्गशीर्ष मास के शुक्लपक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है। इस दिन श्रीहरि के नाम का संकीर्तन, भक्तिगीत, नृत्य करना चाहिए। साथ ही रात्रि जागरण भी करना चाहिए।
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एकादशी व्रत 2018 - फोटो : अमर उजाला।
यह है मोक्षदा एकादशी का महत्व
पंडित अवधेश मिश्रा के अनुसार इस व्रत की कथा, पूजन करने से वाजपेयी यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है। मोक्षदा एकादशी को लेकर ऐसी भी मान्यता है कि इस दिन तुलसी की मंजरी, धूप, दीप, नैवेद्य आदि से भगवान दामोदर का पूजन करने, उपवास रखने व रात्रि में जागरण कर श्रीहरि का कीर्तन करने से महापाप का भी नाश हो जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस व्रत का फल पूर्वजों को भी प्राप्त होता है। इसलिए मनुष्यों के लिए यह अत्यंत ही पुण्यकारी बताया गया है। यह एकादशी मुक्तिदायिनी तो है ही साथ ही इसे समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली भी माना जाता है।

 

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एकादशी। - फोटो : अमर उजाला।
मोक्षदा एकादशी व्रत कथा
पंडित अरविंद गिरि ने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार गोकुल नगर में वैखानस नामक राजा राज करता था उनके राज में प्रजा अत्यंत सुखी थी, लेकिन एक दिन उसे स्वप्न आया कि उनके पिता नरक में बहुत कष्ट भोग रहे हैं, उनके पूर्व कर्मों की वजह से उनके साथ ऐसा हो रहा है। यह जानकर उनको बहुत ही दुख हुआ।

 
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एकादशी व्रत। - फोटो : अमर उजाला।
उन्हें इसका मतलब समझ नहीं आया, अंत में उन्होंने ब्राह्मणों को बुलावा भेजा और उनसे इसका मतलब पूछा तब उन्हें ज्ञात हुआ कि उनके पिता के बिगड़े हुए कर्मों की वजह से उनके साथ ऐसा हो रहा है। ब्राह्मणों ने राजा को मोक्षदा एकादशी के व्रत के बारे में बताया, राजा ने उसे धारण किया जिसके फलस्वरूप उनके पिता को नरक के कष्टों से मुक्ति मिली। नरक के कष्टों से मुक्ति पाकर राजा के पिता ने उन्हें आशीर्वाद दिया जिसके फलस्वरूप उनके राज्य में और अधिक समृद्धि आ गई।
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