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गोरखपुर में मोहन भागवत बोले- लंबे समय से किए जा रहे हैं समाज को तोड़ने वाले संवाद

Sat, 25 Jan 2020 10:14 PM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत। - फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने देश विरोधी और विवादित बयान देने वालों पर निशाना साधा है। गोरक्ष, कानपुर, अवध और काशी प्रांत के सम्मेलन में आए भागवत ने कहा कि लंबे समय से समाज तोड़क विपरीत संवाद खड़ा किया जा रहा है। इसे खत्म करने के लिए सामाजिक समरसता जरूरी है। कुछ विकृतियों के कारण समाज का तानाबाना टूटा है। हमें भेदभाव को पूरी तरह हटाकर मिलजुल कर रहना होगा, तभी वास्तविक विकास आएगा।
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आरएसएस के पांच दिवसीय (23-27 जनवरी) प्रांतीय सम्मेलन के तीसरे दिन पहले सत्र का उद्घाटन सरसंघचालक मोहन भागवत ने किया। साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के अवध, काशी, गोरक्ष और कानपुर प्रांत की टोली व प्रांत कार्यकारिणी से सीधा संवाद किया। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि जाति और छूआछूत जैसे सामाजिक विकार शीघ्र समाप्त होने चाहिए। समाज का मन बदलना चाहिए। सामाजिक अहंकार और हीनभाव समाप्त होना चाहिए।

समाज के सभी वर्ग को एक साथ लेकर गांव-गांव जाएं। भारतीय जीवन मूल्यों को विस्तार से बताएं और अच्छा वातावरण तैयार करें। इससे समाज के सज्जन लोग परिवर्तनकारी गतिविधियों के साथ जुड़ते चले जाएंगे। बिना किसी प्रचार व शासन के सहयोग के ही सहज ढंग से समाज के सज्जन लोगों के साथ मिलकर कार्यकर्ता जल्द परिवर्तन करा देंगे। ऐसा हुआ तो समाज का सभी तबका आपसी भेदभाव को भूलकर व सभी विकारों से मुक्त होकर समरस भाव से खड़ा हो जाएगा।

वृक्षारोपण से बचेगा समाज
आरएसएस प्रमुख ने पर्यावरण के असंतुलन और दुष्प्रभावों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण से समाज को बचाया जा सकता है। जल संरक्षण भी जरूरी है। पानी की बर्बादी न हो और प्लास्टिक मुक्त समाज बने, इसके लिए सबको गंभीरता से प्रयास करने होंगे। इस दिशा में स्वयं सेवक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। प्रशिक्षण से जागरूकता फैलाकर पानी की बर्बादी रोकी जा सकती है। प्लास्टिक मुक्त समाज बनाया जा सकता है।
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जैविक खेती से बचेगा जन, जमीन और जल

प्रांतीय सम्मेलन में ग्राम्य विकास का एजेंडा भी रखा गया था। इसपर आरएसएस प्रमुख ने कहा कि जैविक खेती का दायरा बढ़े, इसके लिए गंभीरता से प्रयास करने होंगे। रासायनिक खादों से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कमजोर हो गई है। अन्न की गुणवत्ता भी प्रभावित हुर्ह है। रासायनिक खेती ने जल, जमीन और जन को नुकसान पहुंचाया है। अब जरूरत जैविक खेती करने की है। जिस तरह से हम आदर्श जीवन में यम-नियम का पालन करते हैं, उसी तरह आदर्श और उन्नत खेती के नियमों का पालन भी करना होगा, तभी सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। अपनी जमीन को भगवान मानकर बिना किसी स्वार्थ के उसकी सेवा यानी कृषि करना है। अच्छे परिणाम के लिए धैर्य और संतोष जरूरी है।

स्वच्छता का संदेश भी दिया
सरसंघचालक ने स्वच्छता अपनाने का संदेश भी दिया और कहा कि ग्रामीण, शहरी क्षेत्र में साफ-सफाई बेहतर हो तो बीमारी नहीं घेरेगी। यह काम जागरूकता से संभव है। जिस तरह से हम अपने घर को साफ-सुथरा रखते हैं, उसी तरह से घर के बाहरी हिस्से को भी साफ रखना चाहिए।

आरएसएस प्रमुख ने प्रार्थना सभा, फिर शाखा में भी हिस्सा लिया। स्वयं सेवकों के साथ गणवेश में दिखे, फिर राष्ट्रीय और प्रांतीय पदाधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठक करके पर्यावरण संरक्षण, ग्राम्य विकास सहित अन्य योजनाओं पर चर्चा की।
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