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जेईई मेन से बीटेक में प्रवेश के लिए एनटीटी को पत्र लिखेगा एमएमएमयूटी, बैठक में प्रस्ताव को मिली मंजूरी

Wed, 23 Dec 2020 01:13 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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MMMUT - फोटो : अमर उजाला।
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मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएयूटी) बीटेक पाठ्यक्रम में जेईई (ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम) से प्रवेश लिए जाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन एनटीटी (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) को पत्र लिखेगा। ताकि विश्वविद्यालय को जेईई मेन से प्रवेश लेने वाले संस्थानों और विश्वविद्यालयों की सूची में शामिल किया जा सके।
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एमएमएमयूटी में हुई प्रबंध बोर्ड की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। विश्वविद्यालय की तैयारी अगले सत्र से जेईई मेन के माध्यम से शत प्रतिशत प्रवेश लेने की है। हालांकि एनटीटी की अनुमति के बाद ही यह संभव हो पाएगा। विश्वविद्यालय अब तक मालवीय एंट्रेंस टेस्ट के माध्यम से बीटेक और अन्य पाठ्यक्रम में प्रवेश लेता रहा है। इस टेस्ट से बीटेक की 90 फीसद सीटों पर प्रवेश लिया जाता है। 10 फीसद सीटें जेईई मेन से भरी जाती हैं। कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने कहा कि जेईई मेन से जुड़ जाने से विश्वविद्यालय को देशभर के मेधावी छात्र मिलने लगेंगे। इससे पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ेगी।
 
अन्य पाठ्यक्रमों के लिए होगा मालवीय एंट्रेंस टेस्ट
मालवीय एंट्रेंस टेस्ट का आयोजन अब विश्वविद्यालय में चलने वाले अन्य पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए किया जाएगा। इसके लिए पूर्व की तरह अन्य शहरों में भी परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे।
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निर्बाध पढ़ाई में मदद करेगी छात्र कल्याण निधि

छात्र कल्याण निधि की स्थापना और संचालन के प्रस्ताव को भी मंजूरी बोर्ड की बैठक में दी गई। इस निधि की स्थापना के पीछे विश्वविद्यालय का उद्देश्य उन छात्रों की पढ़ाई को निर्बाध जारी रखना है, जिनकी पढ़ाई आय का स्रोत माता-पिता के निधन से बाधित हो जाती है। ऐसे छात्रों की पढ़ाई की शेष अवधि की फीस छात्र कल्याण निधि से दी जाएगी। यदि अध्ययन अवधि में छात्र की म़ृत्यु हो जाती है तो उसके माता-पिता या अभिभावक को एक लाख रुपये दिए जाएंगे।

यदि छात्र किसी दुर्घटना में दिव्यांग हो जाता है तो उस दशा में निधि से उसे एक लाख रुपये दिए जाएंगे। आशिंक अपंगता की स्थिति में 50 हजार रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। गंभीर बीमारी होने पर ही 50 हजार रुपये की चिकित्सा प्रतिपूर्ति दी जाएगी। निधि का संचालन एक निकाय करेगा, जिसके अध्यक्ष अधिष्ठाता छात्र कल्याण होंगे। मंगलवार को वित्त समिति ने इस प्रस्ताव पर मंजूरी दे दी। 
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मेस, बस व लाइब्रेरी शुल्क नहीं देना होगा

बोर्ड की बैठक में कोविड को देखते हुए इस बात पर भी सहमति बनी कि विश्वविद्यालय छात्रों से उनकी सुविधाओं का शुल्क लेगा, जिसका वह वर्तमान में उपयोग कर रहे हैं। विश्वविद्यालय में न रहने के कारण जिन सुविधाओं का उपयोग छात्र नहीं कर पा रहे, उनकी फीस अब उन्हें नहीं देनी होगी। इस निर्णय से छात्रों को अब मेस शुल्क, बस शुल्क, लाइबेरी शुल्क नहीं देना होगा।

बोर्ड की बैठक में इन प्रस्तावों को भी मिली मंजूरी
  • स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम के रूप में बी-फार्मा कोर्स का संचालन।
  • सेंटर ऑफ एक्सिलेंस संचालित करने के लिए कैंब्रिज ब्रिटेन की आर्म लिमिटेड के साथ करार।
  • बीटेक कंप्यूटर साइंस की सीटें 120 से बढ़ाकर 180 तथा बीटेक आईटी की सीटें बढ़ाकर 60 से 120 होगी।
  • बीटेक कंप्यूटर साइंस, बीटके आइटी और बीटेक इलेक्ट्रानिक्स के छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और साइबर सिक्योरिटी के विशेषज्ञ कोर्स की सुविधा देना।
  • 60 सीट की क्षमता वाले बीटेक टेक्सटाइल्स इंजीनियरिंग और 30 सीटी की क्षमता वाले बीएससी डाटा साइंस के पाठ्यक्रम को मंजूरी।
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