छात्र कल्याण निधि की स्थापना और संचालन के प्रस्ताव को भी मंजूरी बोर्ड की बैठक में दी गई। इस निधि की स्थापना के पीछे विश्वविद्यालय का उद्देश्य उन छात्रों की पढ़ाई को निर्बाध जारी रखना है, जिनकी पढ़ाई आय का स्रोत माता-पिता के निधन से बाधित हो जाती है। ऐसे छात्रों की पढ़ाई की शेष अवधि की फीस छात्र कल्याण निधि से दी जाएगी। यदि अध्ययन अवधि में छात्र की म़ृत्यु हो जाती है तो उसके माता-पिता या अभिभावक को एक लाख रुपये दिए जाएंगे।
यदि छात्र किसी दुर्घटना में दिव्यांग हो जाता है तो उस दशा में निधि से उसे एक लाख रुपये दिए जाएंगे। आशिंक अपंगता की स्थिति में 50 हजार रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। गंभीर बीमारी होने पर ही 50 हजार रुपये की चिकित्सा प्रतिपूर्ति दी जाएगी। निधि का संचालन एक निकाय करेगा, जिसके अध्यक्ष अधिष्ठाता छात्र कल्याण होंगे। मंगलवार को वित्त समिति ने इस प्रस्ताव पर मंजूरी दे दी।
बोर्ड की बैठक में कोविड को देखते हुए इस बात पर भी सहमति बनी कि विश्वविद्यालय छात्रों से उनकी सुविधाओं का शुल्क लेगा, जिसका वह वर्तमान में उपयोग कर रहे हैं। विश्वविद्यालय में न रहने के कारण जिन सुविधाओं का उपयोग छात्र नहीं कर पा रहे, उनकी फीस अब उन्हें नहीं देनी होगी। इस निर्णय से छात्रों को अब मेस शुल्क, बस शुल्क, लाइबेरी शुल्क नहीं देना होगा।
बोर्ड की बैठक में इन प्रस्तावों को भी मिली मंजूरी
- स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम के रूप में बी-फार्मा कोर्स का संचालन।
- सेंटर ऑफ एक्सिलेंस संचालित करने के लिए कैंब्रिज ब्रिटेन की आर्म लिमिटेड के साथ करार।
- बीटेक कंप्यूटर साइंस की सीटें 120 से बढ़ाकर 180 तथा बीटेक आईटी की सीटें बढ़ाकर 60 से 120 होगी।
- बीटेक कंप्यूटर साइंस, बीटके आइटी और बीटेक इलेक्ट्रानिक्स के छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और साइबर सिक्योरिटी के विशेषज्ञ कोर्स की सुविधा देना।
- 60 सीट की क्षमता वाले बीटेक टेक्सटाइल्स इंजीनियरिंग और 30 सीटी की क्षमता वाले बीएससी डाटा साइंस के पाठ्यक्रम को मंजूरी।