किसानों को स्मार्ट बनाने के साथ आमदनी बढ़ाएगा ‘एएमएस’
गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के इलेक्ट्रानिक्स और कम्युनिकेशन विभाग के शोधार्थी अपनी तकनीक से किसानों को स्मार्ट बनाएंगे। इसके साथ ही उनकी आमदनी को भी बढ़ाएंगे। ये शोधार्थी एक ऐसा ‘एग्रीकल्चर मॉनिटरिंग सिस्टम’ बना रहे हैं, जो किसानों को कम लागत में ज्यादा मुनाफा का जरिया बनेगा। सोमवार को इसका पहला ट्रायल कुलपति प्रो. जेपी पांडेय की मौजूदगी में खोराबार के रामलखना गांव में होने जा रहा है। जहां सेंसरयुक्त ड्रोन से खेत में कीटनाशक दवा का छिड़काव किया जाएगा।
इस योजना के समन्वयक प्रो. एसके सोनी ने बताया कि सिस्टम में सेंसर, ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटिलेंस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस शोध का उद्देश्य गांव को स्मार्ट गांव बनाना है। साथ ही खेती को रोजगारपरक बनाकर युवाओं का गांव से पलायन रोकना है। इस सिस्टम को बनाने मेें कुल तीन करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जिसका वहन केंद्र सरकार का इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय कर रहा है।
किसानों को मोबाइल पर मिलेगी सटीक जानकारी
शोध टीम में शामिल प्रो. ब्रजेश कुमार ने बताया कि ‘एएमएस’ से मिलने की वाली जानकारी को किसानों से साझा करने के लिए एक एप भी तैयार किया जाएगा। एप से जुड़ने के बाद उनके खेत से जुड़ी जानकारी उन्हें समय-समय पर मिलती रहेगी। ‘एएमएस’ को एक साल में तैयार कर लिया जाएगा।
एएमएस से मिलेंगी ये सूचनाएं
- मिट्टी में नमी की स्थिति।
- मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश आदि तत्व की स्थिति।
- खेत में कौन सी उपज बेहतर होगी।
- कीटों और रोगों से बचाव की सलाह।
- फसल में कीटनाशक के छिड़काव का समय।