गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने विद्यार्थियों के लिए संरक्षक प्रणाली लागू की है। इसका उद्देश्य प्रतिस्पर्धा के दौर में छात्रों से निरंतर संवाद व परामर्श उपलब्ध कराना है। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में यह सहायक साबित हो सकता है। इस योजना के तहत हर 10 विद्यार्थी पर एक शिक्षक को संरक्षक बनाया गया है।
एमएमएमयूटी में पढ़ने वाले ज्यादातर छात्र-छात्राएं अपने घरों से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहते हैं। अलग-अलग कारणों से शिक्षा और कॅरिअर को लेकर दबाव स्वाभाविक रूप से रहता है। इन समस्याओं के समाधान के लिए संरक्षक प्रणाली लागू की गई है। इसके तहत स्नातक प्रथम वर्ष के छात्रों के संरक्षक के रूप में युवा शिक्षक नियुक्त किए गए हैं।
द्वितीय से चतुर्थ वर्ष तक के छात्रों के लिए वरिष्ठ शिक्षकों को संरक्षक का दायित्व दिया गया है। संरक्षक प्रथम वर्ष के छात्रों को अध्ययन पद्धति, हाॅस्टल, विभाग, प्रयोगशाला आदि की जानकारियों के साथ परिसर के प्रति जुड़ाव बढ़ाएंगे। द्वितीय से चतुर्थ वर्ष तक के शिक्षक इंटर्नशिप और प्लेसमेंट आदि का मार्गदर्शन करेंगे। वे छात्रों की व्यक्तिगत समस्याओं के निराकरण की भी कोशिश करेंगे।
कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने बताया कि विश्वविद्यालय में संरक्षक प्रणाली लागू कर दी गई है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को परिसर से जोड़कर उनके व्यक्तित्व को निखारना है। शिक्षक-छात्र संवाद से बेहतर कॅरिअर की राह भी खुलेगी।