फोटो- बिहार की लापता युवती तीन माह बाद परिजनों से मिली मातृ छाया चैरिटेबल फाउंडेशन युवती की कर रहा था देखरेख अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। बिहार के सुपौल के वार्ड नंबर दो की रहने वाली युवती माजता परवीन आखिरकर तीन माह बाद अपने परिवार से मिल गई। मानसिक रूप से बीमार माजता को ठीक देखकर बुजुर्ग पिता ने खुशी जताते हुए मातृ छाया चैरिटेबल फाउंडेशन के संचालक आलोक मणि त्रिपाठी के प्रति आभार जताया है। जानकारी के मुताबिक बिहार के सुपौल के वार्ड नंबर दो की रहने वाली माजता परवीन अपने सबसे बड़े भाई के साथ पंजाब में रहती थी। मां से मिलने वह 16 मार्च को ट्रेन से बिहार जा रही थी। माजता के पिता के मुताबिक देवरिया रेलवे स्टेशन पर वह छूट गई। इसके बाद उसे ढूंढने का काफी प्रयास किया गया, लेकिन वह नहीं मिली। बताया कि उसकी मानसिक स्थिति खराब थी। इसकी वजह से परिवार और तनाव में था। इस बीच वह आजमगढ़ पहुंच गई और वहां से 18 मार्च को उसे आजमगढ़ पुलिस ने गोरखपुर के मातृ छाया चैरिटेबल फाउंडेशन के सुपुर्द कर दिया। आलोक मणि त्रिपाठी ने बताया कि मनोचिकित्सक डॉ अभिनव श्रीवास्तव ने इलाज शुरू किया। असर यह रहा है कि 15 दिनों बाद उसने अपने घर की जानकारी दी। इसके बाद परिजनों को यह जानकारी दी गई है कि उनकी बेटी सुरक्षित है। हालांकि दुख की बात यह रही है कि माजता की मां ने बेटी के लापता होने की गम में दुनिया छोड़ गई। मंगलवार को माजता के पिता उसे लेने सुपौल से गोरखपुर आए थे। पिता को देख माजता ने उन्हें गले लगा लिया और कभी दूर न जाने की कसम खाई। इसके बाद वह उसे लेकर सुपौल चले गए। जाते-जाते उन्होंने फाउंडेशन के प्रति आभार जताते हुए कहा कि ऐसा देखभाल घर के लोग भी नहीं कर पाते, जिस तरह से मेरी बेटी का देखभाल किया गया है।