विधाता ने इस महिला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं दी, लेकिन इतनी समझ जरूर दी कि कोई बच्चे छुएगा तो कोरोना हो सकता है। बृहस्पतिवार की देर रात एक मानसिक रूप से बीमार महिला ने रुस्तमपुर के दुर्गा चौक के पास बच्चे को जन्म दिया तो आसपास के लोगों ने जिम्मेदारी निभाते हुए उसे महिला अस्पताल पहुंचा दिया।
वहां पहुंचने पर शुक्रवार की सुबह स्वास्थ्यकर्मियों ने देखा कि वह बच्चे को बोतल से पानी पिला और बिस्कुट खिला रही थी। इस पर कर्मियों ने नवजात को उससे अलग करने की कोशिश की तो वह बोली, मत छुओ बेटे को कोरोना हो जाएगा। यह सुनकर सभी हैरत में रह गए।
हतप्रभ स्वास्थ्यकर्मी सोचने लगे काश, यह बात सबके समझ में आ जाती। वे समझ नहीं पा रहे थे कि यह कोरोना के खौफ का असर है या फिर मां की ममता। इसके बाद हेल्प डेस्क मैनेजर अमर नाथ जायसवाल ने इसकी जानकारी अधिकारियों को दी। सूचना पर नगर निगम चौकी इंचार्ज अरविंद कुमार राय, चाइल्ड लाइन की नीलम सिंह और राजू पासवान, छाया मातृ चैरिटेबल फाउंडेशन के आलोक पांडेय पहुंचे।
अमरनाथ ने बताया कि महिला बच्चे को छूने तक नहीं दे रही थी। इसकी वजह से बच्चे को खतरा ज्यादा था। बताया कि पूरे वार्ड में अफरा-तफरी का माहौल हो गया था। वह सिर्फ एक ही रट लगाए हुए थी कि मत छुओ बेटे को, नहीं तो कोरोना हो जाएगा।