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आइसोलेशन वार्ड में दूसरे दिन भी एक शख्स की मौत, नहीं हुई जांच, अब लोगों को सता रहा ये डर

Thu, 09 Apr 2020 09:26 AM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
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BRD medical college - फोटो : अमर उजाला
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गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मंगलवार की रात कुशीनगर के अहिरौली क्षेत्र के पूर्व प्रधान की आइसोलेशन वार्ड में मौत हो गई। इस बार भी कॉलेज प्रशासन ने मरीज का सैंपल नहीं लिया। दो दिनों में आइसोलेशन वार्ड में दूसरी मौत है। दोनों मरीजों का सैंपल नहीं लिया गया है। ऐसे में परिजन और इलाज कराने आए लोग इस डरे हुए है।
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जानकारी के अनुसार कुशीनगर के अहिरौली क्षेत्र के भगवानपुर खुर्द के पूर्व प्रधान सिराजुद्दीन अंसारी की तबीयत शनिवार से ही खराब थी। परिजनों के मुताबिक उन्हें सांस लेने में तकलीफ थी और उल्टी भी हो रही थी। अचानक सीने में दर्द की शिकायत बढ़ी तो परिजन सुकरौली व हाटा में इलाज के लिए ले गए। 

जहां पर प्राथमिक इलाज के बाद मंगलवार की रात नौ बजे के करीब परिजन कुशीनगर जिला अस्पताल लेकर गए। वहां से डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर डॉक्टरों को प्रारंभिक जांच में कोरोना संक्रमण के संदिग्ध लक्षण दिखने पर आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करा दिया।
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नहीं थे बेहतर इंतजाम

सिराजुद्दानी के साथ उनकी पत्नी सामना खातून और बेटा अमन अंसारी साथ रहे। इसके बाद उन्हें भी कुछ देर बाद बाहर जाने के लिए कह दिया गया। करीब एक घंटे बाद 12.30 बजे के करीब कर्मचारियों ने बताया कि उनकी मौत हो चुकी है।

परिजनों और उनके साथ आए लोगों ने आरोप लगाया कि कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए बने आइसोलेशन वार्ड में इलाज की बेहतर व्यवस्था नहीं थी। वार्ड के अंदर डॉक्टर आधे घंटे तक तो मरीज को रिसेप्शन काउंटर पर ही बैठाए रह गए। कई बार टोकने के बाद एक कर्मचारी स्ट्रेचर लेकर आया और मरीज को अंदर लेकर गया। वहीं, वार्ड में तीमारदारों और परिजनों को जाने नहीं दिया गया।

मौत की वजह कार्डियक पल्मोनरी अरेस्ट बताई गई
आइसोलेशन वार्ड में दो दिनों में दो लोगों की मौत हो चुकी है। दोनों मौतों में कॉलेज प्रशासन ने सैंपल नहीं लिया है। मामले में डॉक्टरों ने मृत्य प्रमाण पत्र बना दिया। मौत की वजह मृत्य प्रमाण पत्र में कार्डियक पल्मोनरी अरेस्ट बताया गया है। वहीं, महराजगंज की महिला की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने चार परिजनों के सैंपल लेकर बुधवार को आरएमआरसी भेज दिया है।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ गणेश कुमार ने कहा कि आइसोलेशन वार्ड में अब 24 घंटे सैंपुल लेने की सुविधा शुरू कर दी गई है। कर्मचारी तैनात कर दिए गए है। कुशीनगर वाले मामले की जानकारी नहीं है।
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विशेषज्ञ बता रहे बड़ी चूक

मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से दो दिन में हुई मौत के बाद मरीजों के सैंपल न लेना एक्सपर्ट बड़ी चूक बता रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सांस लेने में मरीज को तकलीफ थी, तो सैंपल लेना चाहिए। सैंपल लेने के बाद यह बात तो तय हो जाती कि मरीज में संक्रमण के लक्षण थे या नहीं।

अगर जांच में कोरोना के लक्षण मिल जाते है तो कम से कम दूसरों को इस वायरस से बचाया जा सकता है। बस्ती में मृत युवक का सैंपल लेने के बाद ही लोगों को यह जानकारी हो पाई थी कि उसमें कोरोना के संक्रमण थे। उसी आधार पर जब लोगों की जांच शुरू हुई तो सात लोगों में कोरोना संक्रमण के लक्षण मिले।

अलक्षणिक सबसे ज्यादा खतरनाक
आरएमआरसी के निदेशक डॉ रजनीकांत ने बताया कि अलक्षणिक सबसे खतरनाक हैं। तब्लीगी जमात के छह लोगों में लक्षण नहीं थे। इसके बाद भी उनके अंदर कोरोना के संक्रमण मिले है। ऐसी स्थिति में जांच बेहद जरूरी है।

अगर किसी को सांस लेने में तकलीफ होती है तो उसकी जांच जरूर कराई जाए। जिससे की सही समय पर वायरस के संक्रमण को रोका जा सके। नहीं तो स्थिति और भी भयावह होगी।
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