ब्रेस्ट कैंसर को लंबे समय से महिलाओं की बीमारी माना जाता रहा है लेकिन अब पुरुषों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। गोरखपुर एम्स के ऑन्कोलॉजी विभाग में हाल ही में छह पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर की पुष्टि हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि ब्रेस्ट कैंसर के करीब 99 प्रतिशत मामले महिलाओं में पाए जाते हैं लेकिन पुरुष भी इससे पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। जेनेटिक कारणों से पुरुषों में जोखिम बढ़ रहा है।
ऑन्कोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शशांक शेखर ने बताया कि पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के मामले बेहद कम होते हैं। न्होंने बताया कि हमने करीब 10 हजार कैंसर मरीज देखे हैं, लेकिन अबतक 6 पुरुषों में ये बीमारी मिली है। इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
स्तन के आसपास गांठ बनना, खून या अन्य प्रकार का स्राव होना, त्वचा में सिकुड़न या अन्य बदलाव दिखाई देने जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बीमारी बढ़ने के बाद ही मरीज अस्पताल पहुंचते हैं, जिससे उपचार जटिल हो सकता है। समय पर जांच और इलाज से इस बीमारी पर प्रभावी ढंग से काबू पाया जा सकता है।
जेनेटिक कारण से होता है ब्रेस्ट कैंसर
डॉ. शशांक शेखर ने बताया कि पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर का सबसे प्रमुख कारण आनुवंशिक (जेनेटिक) बदलाव है। यदि परिवार में माता, बहन या किसी करीबी रिश्तेदार को ब्रेस्ट कैंसर रहा है तो पुरुषों में भी इसका खतरा बढ़ जाता है।
इसके अलावा कुछ जीन में बदलाव, हार्मोनल असंतुलन, बढ़ती उम्र, मोटापा और लिवर संबंधी कुछ बीमारियां भी जोखिम बढ़ाती हैं। हालांकि, पुरुषों में यह बीमारी दुर्लभ है लेकिन किसी भी असामान्य गांठ या बदलाव को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
ऐसे करें बचाव
- स्तन में किसी भी तरह की गांठ या बदलाव को नजरअंदाज न करें।
- परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास हो तो नियमित चिकित्सकीय जांच कराएं।
- संतुलित आहार लें, नियमित व्यायाम करें और उचित वजन बनाए रखें।
- धूम्रपान और अत्यधिक शराब के सेवन से बचें।
- किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत ऑन्कोलॉजिस्ट या विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लें।