- गीडा सीईओ की अध्यक्षता में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर हुई बैठक
- सीईटीपी के स्थापना की प्रगति को लेकर भी हुई चर्चा
गोरखपुर। गीडा क्षेत्र में औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अब नालों के पानी की भी जांच कराई जाएगी। मंगलवार को गीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए गए। प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई करने को कहा गया।
बैठक में क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी आशुतोष चौहान, गीडा के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी रामप्रकाश समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने गीडा क्षेत्र में संचालित औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले उत्प्रवाह और उससे होने वाले संभावित प्रदूषण पर चर्चा की। सीईओ ने क्षेत्रीय अधिकारी-प्रदूषण को निर्देश दिया कि प्रदूषण जनित इकाइयों के आसपास की नालियों के पानी के नमूने लिए जाएं। इसके साथ ही जिन नालों में औद्योगिक इकाइयों का पानी गिर रहा है, वहां से भी सैंपल लेकर जांच कराई जाए। जांच में मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित इकाइयों के खिलाफ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रभावी नियमों के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में गीडा में औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले उत्प्रवाह के शोधन के लिए प्रस्तावित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की स्थापना की प्रगति पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि सीईटीपी का डीपीआर शासन से अनुमोदित होने के बाद स्वीकृति के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) को भेजा गया है। फिलहाल डीपीआर की स्वीकृति एनएमसीजी स्तर पर लंबित है। सीईओ ने अधिकारियों को एनएमसीजी से समन्वय स्थापित कर प्रभावी पैरवी करने के निर्देश दिए ताकि डीपीआर को जल्द मंजूरी मिल सके और गीडा में सीईटीपी की स्थापना का काम आगे बढ़ाया जा सके।