- बीआरडी मेडिकल कॉलेज में तीमारदारों की पिटाई का मामला
- तीन दिन में दो तीमारदारों के साथ हुई मारपीट, केस दर्ज नहीं
- पहले भी कई घटनाओं में नहीं लिखी गई एफआईआर
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टर मरीजों को आए दिन पीटते हैं, लेकिन ऐसे मामलों में पीड़ितों की फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है। कालेज प्रशासन हर मामले में जांच कमेटी गठित कर अपना पल्ला झाड़ लेता है और पुलिस डॉक्टरों का मामला होने के चलते केस दर्ज नहीं कर रही है। इससे मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने आए मरीजों में खौफ है।
बीते मंगलवार को महराजगंज जिले के पनियरा क्षेत्र का रहने वाला प्रिंस कुमार गुप्ता अपनी मां के आंखों का इलाज कराने बीआरडी मेडिकल कॉलेज आया था। यहां केवल वार्ड का रास्ता पूछने मात्र से भड़के जूनियर डॉक्टर ने अपने साथियों को बुलाकर प्रिंस की पिटाई की। बीच बचाव करने गई मां को भी पीटा गया। मां-बेटे ने डॉयल 112 पर सूचना दी तो पुलिस पहुंची, लेकिन केस दर्ज नहीं किया गया। अब इस मामले की जांच के लिए जो तीन सदस्यीय कमेटी बनी है, उसकी जांच भी सुस्त हो गई है जबकि पहले तीन दिन में जांच रिपोर्ट लेकर कार्रवाई की बात कही जा रही थी।
बृहस्पतिवार को बस्ती की रहने वाली खातून निशा ने मेडिसिन इमरजेंसी वार्ड में भर्ती पति के इलाज के बारे में पूछताछ की तो भड़के जूनियर डॉक्टरों ने उसे और उसकी नतीनी नगमा को पीटा। रात भर पीड़िता वार्ड के बाहर बैठी रही। भोर में घरवाले आए मरीज को बीआरडी मेडिकल कॉलेज से निकालकर निजी अस्पताल ले गए। पीड़िता ने इस मामले में प्रिंसिपल के अलावा पुलिस को भी सूचना दी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
-
पीटा, शव रोका, शिकायतकर्ता पर ही केस भी दर्ज हुआ
पिछले महीने संतकबीरनगर के एक बुजुर्ग को पेट में दिक्कत होने पर इमरजेंसी वार्ड में लाया गया था। इलाज में लापरवाही दिखने पर उसके दामाद सहजनवा निवासी रमेश मिश्र के साथ मारपीट की गई। रमेश ने उसी दिन गुलरिहा थाने में घटना की सूचना दी। पुलिस ने दोनों पक्ष को बुलाया। अगले दिन मरीज की मौत हो जाने पर शव बिना पोस्टमार्टम कराए ही लौटाया गया। इसके अगले दिन आरोपी डॉक्टर के दबाव में पीड़ित रमेश मिश्रा पर ही केस दर्ज कर लिया गया। रमेश अपनी पीड़ा लेकर एसएसपी से मिलने गए तो वहां मौजूद दिवस अधिकारी ने उसे वापस गुलरिहा थाने भेज दिया। वहां दरोगा ने पहले से केस दर्ज होने की बात कहकर टरका दिया। चारों तरफ से नाउम्मीद रमेश ने मामले में पैरवी भी छोड़ दी।
-
व्यवस्था में बदलाव का हो रहा प्रयास: प्राचार्य
मारपीट की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। महराजगंज के युवक के प्रकरण की जांच कराई जा रही है। वहीं बस्ती की महिला की गलती थी, उसने डॉक्टर से अभद्रता की। पुराने मामलों की जानकारी नहीं है। अब हर दिन सुबह एक घंटे मरीजों व अन्य पीड़ितों की बात सुनी जाती है और तत्काल निस्तारण कराया जाता है।
डॉ. रामकुमार जायसवाल, प्राचार्य-बीआरडी मेडिकल कॉलेज